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'पहले घर संभालें, पीओके में सैन्य कार्रवाई का रास्ता बेहद कठिन'

Sun, 18 Sep 2016 10:15 PM IST
मेजर जनरल (रि.) अशोक मेहता/नई दिल्ली
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अशोक मेहता
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हिंसा की आग में जल रहे जम्मू कश्मीर के उड़ी में सेना मुख्यालय के आतंकी हमले में 17 जवान शहीद हो गए। इस राज्य में आतंकी हमला बड़ी बात नहीं है। मगर चूंकि इस बार नुकसान बड़ा है, इसलिए मीडिया और सियासत में शोर शराबा भी ज्यादा हो रहा है। ऐसे आतंकी हमलों के बाद हमेशा की तरह उच्च स्तरीय बैठक और जवाबी हमले की धमकियों के जरिये रस्म अदायगी की जा रही है।
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हालांकि हाल के दिनों का यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है, वह भी तब जब पहले ही हमले का न सिर्फ अलर्ट जारी हो चुका था, बल्कि कश्मीर में जारी हिंसा के कारण सुरक्षा बंदोबस्त को चाक चौबंद बताया जा रहा था। सवाल है कि आखिर सात दशक से भी अधिक समय की इस समस्या का निदान क्या है? जिन विकल्पों पर बात हो रही है उनमें पाकिस्तान स्थित आतंकी शिविरों पर सीधा हमला, कश्मीर को सेना के हवाले करने और सख्ती बरतने संबंधी विकल्प का शोर ज्यादा है।

मेरा मानना है कि इस समस्या का सैन्य समाधान संभव नहीं है। बात युद्घ की हो तो स्थिति दूसरी है, मगर जब समस्या घर की हो तो सेना के जरिये विकल्प तलाशने का माध्यम कारगर साबित नहीं हो सकता। जहां तक पाकिस्तान स्थित आतंकी शिविरों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई संबंधी विकल्प है तो यह बेहद कठिन रास्ता है।
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पाकिस्तान के खिलाफ जनमत बनाना होगा

- फोटो : PTI
कठिन इसलिए कि इस मामले में दुनिया में पाकिस्तान के खिलाफ जनमत बनाना होगा। फिर हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि हमारा पड़ोसी भी हमारी ही तरह परमाणु शक्ति संपन्न होने के साथ-साथ एक बेहद गैर जिम्मेदार देश है। फिर दुनिया में पाकिस्तान के खिलाफ जनमत तभी बनेगा जब हमारा घर ठीक होगा।

आप देख ही रहे हैं कि बीते दो महीने में कश्मीर के हालात क्या हैं। हिंसा में 80 लोगों ने जान गंवा दी है। पाकिस्तान लगातार विश्व मंच पर कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं को प्रचारित कर रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश गया है कि कश्मीर में सब कुछ ठीक ठाक नहीं है।

इसलिए मेरा मानना है कि सरकार को सबसे पहले अपना घर दुरुस्त करना चाहिए। घर दुरुस्त करने के लिए सैन्य स्तर पर नहीं बल्कि सियासी स्तर पर पहल करनी होगी। इसके लिए बातचीत का रास्ता निकालना पड़ेगा।
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भारत ने सैन्य समाधान के कई मौके गंवाए हैं

uri - फोटो : PTI
घर दुरुस्त करने के बाद आप पाकिस्तान से बातचीत की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। तब न सिर्फ पाकिस्तान के दुष्प्रचार की हवा निकलेगी, बल्कि वह दबाव में भी होगा। आजादी के बाद भारत ने सैन्य समाधान के कई मौके गंवाए हैं।

युद्ध में हमने पूर्वी पाकिस्तान को तो अलग किया मगर पश्चिमी पाकिस्तान का कुछ नहीं कर पाए। हमने बिना किसी ठोस आश्वासन के पाकिस्तान के 90000 से ज्यादा सैनिकों को रिहा किया। साल 1965 के युद्घ में जीत के बावजूद हमने कई कूटनीतिक भूल की।

इसके बाद भी बीती सदी के 90 के दशक तक सैन्य समाधान की राह पर बढ़ सकते थे। इसलिए समस्या के समाधान के लिए भारत के पास फिलहाल घर संभालने के बाद सियासी विकल्प आजमाने के अलावा कोई चारा नहीं है।
(हिमांशु मिश्र से बातचीत पर आधारित)
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