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मिलन प्रधान को हाईकोर्ट से झटका: गिरफ्तारी से राहत वाला आदेश खारिज; डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच का आदेश पलटा

Fri, 25 Sep 2026 03:52 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, कोलकाता।

सार

कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (खंडपीठ) ने कांग्रेस के नंदीग्राम उपचुनाव प्रत्याशी मिलन प्रधान को 2007 के आपराधिक मामले में मिली अंतरिम राहत वाला आदेश रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि आपराधिक कानून में ऐसी अंतरिम सुरक्षा का प्रावधान नहीं है और गिरफ्तारी के बाद जमानत या गिरफ्तारी की आशंका में अग्रिम जमानत का विकल्प मौजूद है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून सभी के लिए समान है और चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति के लिए अलग व्यवस्था नहीं हो सकती। प्रधान की सात अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत का आदेश प्रभावी रहेगा।
 
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मिलन प्रधान को राहत नहीं - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ( खंडपीठ) ने शुक्रवार को कांग्रेस के नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी मिलन प्रधान को 2007 के एक आपराधिक मामले में मिली राहत खत्म कर दी। मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सिंगल बेंच (एकल पीठ) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पुलिस को 12 अक्तूबर तक प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया था। पीठ में न्यायमूर्ति ओम नारायण राय भी शामिल थे।
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'आपराधिक कानून में ऐसी अंतरिम सुरक्षा का प्रावधान नहीं'
अदालत ने कहा कि आपराधिक कानून में किसी आरोपी को इस तरह की अंतरिम सुरक्षा देने का कोई प्रावधान नहीं है। पीठ ने कहा कि अगर किसी आरोपी को गिरफ्तार किया जाता है तो वह जमानत मांग सकता है। वहीं, गिरफ्तारी की आशंका होने पर आरोपी अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख कर सकता है।

चुनाव लड़ने के कारण कानून अलग नहीं हो सकता: हाईकोर्ट
डिवीजन बेंच ने यह भी कहा कि कानून सभी के लिए समान है। चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति के मामले में अलग तरीके से विचार नहीं किया जा सकता। सिंगल बेंच का आदेश रद्द होने के बाद कांथी एसीजेएम अदालत की ओर से प्रधान को 7 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश प्रभावी रहेगा।
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छह अक्तूबर को होना है नंदीग्राम उपचुनाव
नंदीग्राम में उपचुनाव छह अक्तूबर को होना है और चुनाव प्रचार चार अक्तूबर को खत्म होगा। इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने प्रधान को 12 अक्तूबर तक राहत दी थी। अदालत ने पुलिस को इस दौरान उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाने का निर्देश दिया था। साथ ही कहा था कि इस मामले में उन्हें गिरफ्तार न माना जाए।

2007 के मामले में हत्या और हत्या के प्रयास के आरोप
कांग्रेस नेता मिलन प्रधान के खिलाफ पूर्व मेदिनीपुर जिले के खेजुरी थाने में 2007 का एक मामला दर्ज है। इसमें हत्या और हत्या के प्रयास समेत कई आरोप हैं। यह मामला नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हुए आंदोलन से जुड़ा है। 18 सितंबर को पूर्व मेदिनीपुर जिला पुलिस ने प्रधान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद खेजुरी थाने के इस मामले में भी उन्हें गिरफ्तार दिखाया गया। 23 सितंबर को कांथी अदालत ने उन्हें सात अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

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छह दूसरे मामलों को लेकर भी दायर हुई थी याचिका
मिलन प्रधान के खिलाफ 2007 में नंदीग्राम और खेजुरी थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। 22 सितंबर को हाईकोर्ट में छह अन्य मामलों में दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग वाली उनकी याचिका पर सुनवाई हुई थी। उस दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि इनमें से पांच मामले पिछली सरकार ने वापस ले लिए थे और छठे मामले में प्रधान वांछित नहीं थे।
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बाकी पांच मामलों में गिरफ्तारी की जानकारी
हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि कांग्रेस नेता प्रधान को बाकी पांच आपराधिक मामलों के संबंध में गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में भेजा गया। अब डिवीजन बेंच के शुक्रवार के फैसले के बाद गुरुवार को मिली वह अंतरिम राहत कायम नहीं रहेगी।
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