दोनों हैं बराबर
भारत के नजरिए से देखा जाए तो मिग-21 और पाकिस्तान का एफ-16 जिसमें कि बाइसन का अपग्रेडेड वर्जन शामिल है, दोनों लगभग बराबर ताकत के हैं। हालांकि एफ-16 ज्यादा दांव-पेंच दिखा सकता है और उसका कॉम्बैट रेंज भी ज्यादा है जबकि मिग एक शॉर्ट लेग्ड विमान है। दोनों में सबसे बड़ा अतंर यह है कि भारतीय विमान जहां शॉर्ट रेंज की आर-73 और आर-77 मिसाइल लेकर जा सकता है वहीं एफ-16 अपने सभी अपडेटेड वर्जन में केवल एआईएम-9 और एमराम एआईएम-120 मिसाइल ले जा सकता है।
एमराम की रेंज 30-40 नॉटिकल माइल्स (55-75 किलोमीटर) की है। पाकिस्तान ने भारत पर एक एमराम दागी थी जिसके टुकड़े भारतीय क्षेत्र में गिरे हुए दिखे थे। वहीं भारत ने पाकिस्तान के विमान पर आर-77 मिसाइल दागी थी जबकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रभावी नहीं है और रूस ने भी इसे केवल एक बार अपग्रेड किया है। कुछ रिपोर्ट्स से यह बात सामने आई है कि जिस एफ-16 को मारा गया था वह दो सीटों वाला बी मॉडल था क्योंकि विमान के हिट होने के बाद उसमें से दो पैराशूट निकले थे।
एफ-16 का बी मॉडल ए के मुकाबले कम सक्षम और कम आधुनिकीकरण वाला विमान है। अपग्रेडेड मिग और एफ-16 में पल्स डॉपलर रडार है। एफ-16 के मुकाबले मिग-21 को उड़ाना काफी मुश्किल है। इसमें पायलट को अपना ध्यान ज्यादा केंद्रित करना पड़ता है क्योंकि फ्लाइट कंट्रोल मैकेनिकल होता है और वह स्टील केबल से जुड़ा होता है। वहीं एफ-16 ज्यादा आधुनिक है और इसे फ्लैप्स, एलेरॉन्स, स्टैबिलाइजर के जरिए इलेक्ट्रॉनिकली नियंत्रित किया जाता है।
वैसे यह पहली बार नहीं है जब भारत ने किसी अमेरिकी विमान को पीछे किया हो। इससे पहले भी भारतीय मिग ने अमेरिकी एफ-15 सी को एक प्रतियोगिता में हराया था। जिसने अमेरिकी विमान के प्रदर्शन पर सवाल खड़े कर दिए थे। भारतीय विशेषज्ञों और कुछ अमेरिकी पायलटों ने अपने निष्कर्ष में इस बात को माना है कि भारतीय पायलटों ने कुछ ऐसी उत्कृष्ट रणनीति विकसित की है जिससे कि वह इलेक्ट्रॉनिक रूप से लड़ाकू विमानों का संचालन कर लेते हैं। जबकि दूसरी ओर अमेरिकी विमानों के बीच स्वत: सामंजस्य बैठाने के लिए स्पलेंडिड रडार और विशेष उड़ान कंप्यूटरों का इस्तेमाल करते हैं।