सीबीएसई ने 10वीं से 12वीं तक के इंक्रिप्टेड प्रश्नपत्र के जरिए परीक्षा कराने के लिए माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के साथ समझौता किया है। माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, इन प्रश्नपत्रों के लिए ऑफिस 365 सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया गया है और दो स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इंक्रिप्टेड पेपर व्यवस्था के तहत स्कूलों को ई-मेल आईडी पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। फिर स्कूल उनका प्रिंटआउट लेकर बच्चों को उपलब्ध कराएंगे। हालांकि यह व्यवस्था कब से लागू की जाएगी, बोर्ड ने इस बारे में स्पष्ट नहीं किया है।
माइक्रोसॉफ्ट द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इंक्रिप्टेड प्रश्नपत्र का पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा है। हाल ही में 487 परीक्षा केंद्रों में कक्षा 10वीं के 4,000 विद्यार्थी इसमें शामिल हुए थे। परीक्षा नियंत्रण विंडोज 10 और ऑफिस 365 के जरिए बने सॉफ्टवेयर के तहत पूरी परीक्षा की निगरानी कर सकता है। उच्च स्तर की सुरक्षा वाले प्रश्नपत्र को केंद्र में डाउनलोड कर छात्रों को मुहैया कराया गया। यह परीक्षा के 30 मिनट पहले ही केंद्र को मिला। प्रश्नपत्र को ऑफिस 365 के जरिए इंक्रिप्ट करने के साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर वाटरमार्क भी शामिल किया गया है। हर केंद्र का वाटरमार्क उसके कोड पर आधारित रखा गया है।
परीक्षा प्रशासक सीबीएसई द्वारा प्रश्न पत्र का वितरण ई-मेल के जरिए केंद्रों को किया गया। इसमें सभी केंद्रों को एक ड्राइव के जरिए लिंक किया गया और निर्धारित केंद्र को तय प्रश्न पत्र ही डाउनलोड कराया गया।
माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, डिजिटल प्रक्रिया के जरिए परीक्षा खर्च कम हुआ, क्योंकि इसमें प्रश्नपत्र कागज के बजाय ऑनलाइन था, जिसे महज एक क्लिक के जरिए भेजा गया और अनुमति भी ऑनलाइन मुहैया कराई गई। कंपनी के प्रबंध निदेशक अनिल भंसाली ने कहा कि डिजिटल रूप से सशक्त शिक्षा व्यवस्था सबसे बेहतर तरीका है।
पूरे देश में नई व्यवस्था को लागू करा पाना चुनौतीपूर्ण
पूरे देश में इस व्यवस्था को लागू कर पाना काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दूरदराज और छोटे इलाकों में ढांचागत सुविधाओं की कमी है। ऐसे में सीबीएसई इसे लागू करने के मामले में पूरी तैयारी के बाद निर्णय लेगा। हाल ही में सीबीएसई सचिव अनुराग त्रिपाठी ने कहा था कि बोर्ड इस बात पर भी विचार कर रहा है कि इस व्यवस्था को लागू करने में पहले केवल बड़े स्कूल ही सेंटर के लिए चुने जाएं जो कि अधिक से अधिक बच्चों को संसाधन उपलब्ध करा सकें।
पूर्ण संसाधन उपलब्ध कराने के बाद ही लागू होगी व्यवस्था
अनुराग त्रिपाठी ने कहा था कि स्कूलों को पूर्ण संसाधन उपलब्ध कराने के बाद ही इसे लागू करने के विषय में विचार किया जाएगा। बता दें कि सीबीएसई ने स्कूलों में टैबलेट पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने पर भी विचार किया था, लेकिन टैबलेट की कीमत अधिक होने के कारण इसे लाखों बच्चों को उपलब्ध कराना काफी मुश्किल था।