इससे पहले इस महीने की शुरुआती सप्ताह में दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना ने मौजूदा आबकारी नीति में भ्रष्टाचार और नीति लागू करने में बरती गई अनियमितताओं के आरोप में 11 अधिकारियों को निलंबित करने की मंजूरी दी थी। एलजी ने सतर्कता निदेशालय (डीओवी) की जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर कार्रवाई की थी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली के आबकारी नीति मामले में आईएएस अधिकारी पूर्व आबकारी आयुक्त ए गोपीकृष्ण और दानिक्स कैडर के अधिकारी आनंद तिवारी को निलंबित कर दिया है। दोनों अधिकारियों को आबकारी नीति घोटाले में सीबीआई की प्राथमिकी में नाम आने के बाद निलंबित किया गया है। दरअसल, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कुछ दिन पहले दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 के संबंध में आबकारी विभाग के 11 अधिकारियों के खिलाफ "गंभीर चूक" के लिए निलंबन और अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने को मंजूरी दी थी।
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सीबीआई ने 19 अगस्त को इन दोनों अधिकारियों के ठिकानों पर भी छापा मारा था। गोपीकृष्ण 2012 बैच के एजीएमयूटी कैडर के आईएएस हैं, जबकि तिवारी 2003 बैच के दानिक्स अधिकारी हैं।
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इससे पहले इस महीने की शुरुआती सप्ताह में दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना ने मौजूदा आबकारी नीति में भ्रष्टाचार और नीति लागू करने में बरती गई अनियमितताओं के आरोप में 11 अधिकारियों को निलंबित और अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने को मंजूरी दी थी। एलजी ने सतर्कता निदेशालय (डीओवी) की जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर कार्रवाई की थी। उन्होंने तत्कालीन आबकारी आयुक्त आरव गोपी कृष्ण और तत्कालीन उपायुक्त आनंद तिवारी समेत सभी आरोपियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के लिए विजिलेंस को भी मंजूरी दे दी थी।
सभी अफसरों पर नई आबकारी नीति (2021-22) बनाने और उसे लागू करने में लापरवाही बरतने के साथ ही नियमों की अनदेखी और नीति के कार्यान्वयन में गंभीर चूक के आरोप लगे थे। इसमें अन्य बातों के साथ-साथ निविदा को अंतिम रूप देने में अनियमितताएं और चुनिंदा विक्रेताओं को टेंडर के बाद लाभ पहुंचाना भी शामिल है। उपराज्यपाल सक्सेना ने नीति में पाई गई घोर अनियमितताओं की जांच सीबीआई को सौंपी थी। आर्थिक अपराध शाखा भी इस मामले की जांच कर रही है।
इनके खिलाफ हुई थी कार्रवाई
तत्कालीन आबकारी आयुक्त आरव गोपी कृष्ण, उपायुक्त आनंद कुमार तिवारी, सहायक आयुक्त पंकज भटनागर, नरेंद्र सिंह व नीरज गुप्ता, सेक्शन अधिकारी कुलजीत सिंह व सुभाष रंजन, सुमन, डीलिंग हेड सत्यव्रत भार्गव, सचिन सोलंकी व गौरव मान के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। जांच के दौरान पाया गया था कि कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया गया व अवैध रूप से खुदरा बिक्री की अनुमति दी गई। दो जोन के लिए लाइसेंस को एक ही निविदा नोटिस के अनुसार जारी किया गया था। यह प्रथम दृष्टया दर्शाता है कि अधिकारी बोलीदाताओं की जांच करने में विफल रहे थे।