‘मी टू’ अभियान से मीडिया और फिल्म जगत में मचे हड़कंप के बीच सुप्रीम कोर्ट ने महिला जिला जज की ओर से दाखिल यौन शोषण के आरोपों वाली याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी किया है। महिला जज ने वर्ष 2014 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। महिला जज ने अब याचिका दायर कर नौकरी बहाल करने की मांग की है। जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने रजिस्ट्रार जनरल से छह हफ्ते में जवाब मांगा है।
याचिका में राज्यसभा द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। वर्ष 2015 में जज पर अभियोग चलाने का प्रस्ताव लाया प्रस्ताव लाया था, जिसके बाद राज्यसभा ने जज पर लगे आरोपों की जांच के लिए कमेटी गठित की थी। कमेटी में सुप्रीम कोर्ट की जज आर भानुमति, पूर्व जज मंजुला चिल्लूर और वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल शामिल थे। गत वर्ष दिसंबर महीने में कमेटी ने राज्यसभा को जांच रिपोर्ट सौंप दी थी।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि हाईकोर्ट जज के पर लगे आरोपों को साबित नहीं किया जा सका। हालांकि रिपोर्ट में अकादमी सत्र के बीच महिला जज के तबादले को गलत बताया गया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि चूंकि महिला जज की बेटी को 12वीं की परीक्षा देनी थी, ऐसे में उनके लिए दूसरी जगह जाना संभव नहीं था। संभवत: ऐसे में महिला जज के पास इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।