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बच्चों के यौन शोषण वाले कंटेंट पर सख्ती: अब ज्यादा सावधानी बरत रहा मेटा; सरकार ने एआई लेबल पर क्या कहा?

Tue, 18 Aug 2026 01:35 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

सरकार ने सीएसएएम कंटेंट को लेकर मेटा से सख्ती बरतने और भारत की भाषा-संस्कृति को ध्यान में रखकर मॉडरेशन करने को कहा है। एआई से बने कंटेंट की पहचान के लिए लेबल और व्हाट्सऐप यूजरनेम को लेकर भी सरकार ने अपना रुख साफ किया है। पढ़िए रिपोर्ट-
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मेटा कार्यालय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स
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विस्तार
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बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाली सामग्री (कंटेंट) यानी सीएसएएम के मामले में मेटा की संवेदनशीलता बढ़ी है। यह प्लेटफॉर्म अब इस तरह के मामलों को लेकर ज्यादा सावधानी बरत रहा है। इसमें गैरकानूनी सामग्री को हटाने या उसे फिल्टर करने की कोशिशें भी शामिल हैं। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी। 
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सूत्रों ने बताया कि सरकार ने मेटा को साफ कर दिया है कि सीएसएएम से जुड़े उल्लंघनों में शामिल किसी व्यक्ति या संस्था को कानूनी सुरक्षा का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार ने मौजूदा कानून और कानूनी व्यवस्था के तहत मिली शक्तियों का ही इस्तेमाल किया है। इस कानूनी दायरे से बाहर जाकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 

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मेटा के अधिकारियों से बातचीत को लेकर सरकारी सूत्रों ने कहा, कंटेंट की निगरानी करने वाली टीमों को भारत की भाषाई और सांस्कृतिक परिस्थितियों को ज्यादा समझने की जरूरत है। केवल वैश्विक मानकों के आधार पर कंटेंट को मॉडरेट करना पर्याप्त नहीं है।  

व्हाट्सएप यूजरनेम को लेकर भी सरकार की नजर
सूत्रों ने कहा कि सरकार व्हाट्सएप यूजरनेम के मुद्दे को पूरे उद्योग के स्तर पर देख रही है। यह मामला किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर लागू होता है। सरकार ने कहा है कि वह आगे भी इन चिंताओं पर नजर रखेगी और उनकी निगरानी करती रहेगी। सरकार का मकसद कंटेंट को सेंसर करना या दबाना नहीं है। उसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसी स्थिति पैदा न करें, जिससे भारत के सामाजिक ताने-बाने पर बुरा असर पड़े।

दूसरे देशों में भी उठ रहे प्लेटफॉर्म से जुड़े सवाल
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्लेटफॉर्म के नियमन को लेकर इसी तरह की चिंताएं पश्चिमी उदार लोकतांत्रिक देशों में भी सामने आई हैं। इससे पता चलता है कि यह सिर्फ भारत की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के सामने मौजूद चुनौती है। सरकार ने कहा कि अलग-अलग देशों की सांस्कृतिक परिस्थितियां अलग होती हैं। भारत में अभिव्यक्ति की आजादी पर संविधान के तहत उचित पाबंदियां लागू रहती हैं।
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एआई से बने कंटेंट पर स्पष्ट लेबल जरूरी
सरकार के मुताबिक, एआई से बनाए गए कंटेंट पर साफ तौर पर लेबल होना चाहिए। इसे यूजर्स के जानने के अधिकार से जुड़ा मामला माना जा रहा है। इसका मतलब है कि यूजर्स को यह साफ पता होना चाहिए कि उनके सामने मौजूद कंटेंट एआई से बनाया गया है या असली है। 
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