दुर्लभ भौगोलिक घटना बुध के पारगमन के दीदार के लिए सोमवार की शाम नक्षत्रशाला में हजारों की भीड़ उमड़ी। क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या नौजवान, हर व्यक्ति विशेष किस्म का चश्मा चढ़ाए, सूर्य की ओर आंखें गड़ाए इस अद्भुत घटना का गवाह बनने की कोशिश में दिखा। हालांकि इस अद्भुत दृश्य के दिख जाने और न दिखने की बहस और जद्दोजहद देर शाम तक चलती रही।
इस भौगोलिक घटना को दर्शकों को दिखाने के लिए नक्षत्रशाला की ओर से विशेष इंतजाम किया गया था। करीब 500 विशेष सोलर चश्मे ओर दूरबीन की व्यवस्था थी। दोपहर दो बजे के बाद से जैसे-जैसे लोगों के आने का सिलसिला शुरू हुआ, उन्हें चश्मे उपलब्ध कराए जाने लगे। शाम चार बजते-बजते नक्षत्रशाला परिसर लोगों से भर गया और मेले सा माहौल हो गया।
लोगों में दुर्लभ भौगोलिक दृश्य देखने की ललक भी। उधर दूरबीन से देखने की लंबी लाइन भी पारगमन देखने की उत्सुकता की गवाही दे रही थी। दृश्य को देखने के लिए कई स्कूलों के बच्चे भी नक्षत्रशाला पहुंचे हुए थे।
हालांकि गोरखपुर से इस दृश्य को देखने का समय चार बजकर 41 मिनट अनुमानित था लेकिन जब कुछ लोगों ने समय से पहले ही सूर्य पर धब्बा दिखने की तस्दीक की तो लोगों की बेताबी और बढ़ गई। ज्यादातर लोगों की यह बेताबी बनी ही रही, क्योंकि वे जिस उम्मीद के साथ घटना को देखने नक्षत्रशाला पहुंचे थे, वह उम्मीद पूरी नहीं हुई।
नक्षत्रशाला के प्रभारी महादेव पांडेय ने बताया कि तय समय पर पारगमन शुरू हो गया। लेकिन सूर्य के सामने बुध तिल की तरह दिख रहा था, इसलिए कई लोग उसे साफ तौर पर नहीं देख पा रहे थे। फिर भी काफी लोगों ने देखने की तस्दीक की है।
पारगमन देखने पहुंचे लोगों से बातचीत
धब्बा ही शायद वही बुध होगा
सुबह स्कूल पहुंचा तो बताया गया कि हमें पारगमन देखने के लिए नक्षत्रशाला जाना है। खुशी से उछल पड़ा। जबसे आया हूं पारगमन देखने की कोशिश कर रहा हूं। सूर्य पर धब्बा सा दिख रहा है, शायद वहीं बुध होगा।
आशीष कुमार, एनई रेलवे ब्वायज इंटर कॉलेज
बहुत समझ में नहीं आया
जब से आई हूं , पारगमन देखने की कोशिश में जुटी हूं लेकिन देखने में सफलता हाथ नहीं लगी है। कुछ स्पॉट साथ दिख तो रहा है, लोग बता रहे हैं कि वही बुध है। सही बताऊं तो यह पारगमन बहुत समझ में नहीं आया।
मोहिनी मिश्रा, विवेकपुरम
मैंने तो भाई देख लिया
पारगमन देखने का प्रयास तो आने के साथ ही शुरू गया था लेकिन देखने में सफलता करीब आधे घंटे बाद मिली। तिल की तरह दिखने वाला सूर्य का धब्बा देखने के बाद मैं कहने की स्थिति में हूं कि मैंने पारगमन देख लिया।
तृप्ती विश्वकर्मा, लेक व्यू कॉलोनी
उत्सुकता बनी ही रह गई
जीवन का लंबा समय गुजर गया लेकिन पारगमन को लेकर इतना प्रचार-प्रसार कभी नहीं हुआ। यह सुनकर मैं भी नक्षत्रशाला पहुंचा लेकिन कम से कम मुझे तो यह पारगमन नहीं ही दिखा, इसलिए उत्सुकता बनी की बनी रह गई।
सैयद अर्शद अली, तिवारीपुर
हजार से अधिक लोगों ने देखा मुफ्त शो
पारगमन की अवधि के दौरान शाम तीन बजे से छह बजे तक नक्षत्रशाला को शो फ्री कर दिया गया था। नक्षत्रशाला के प्रभारी महादेव पांडेय ने बताया कि तीन घंटे की अवधि में हजार से अधिक लोगों ने मुफ्त शो का लुत्फ उठाया और अंतरिक्ष से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारी से रूबरू हुए।
पुरस्कृत किए गए बच्चे
बुध के पारगमन के दौरान नक्षत्रशाला में किए गए इंतजाम के बीच फीडबैक और स्लोगन के लिए प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें 200 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। दोनों ही प्रतियोगिताओं में पांच-पांच विद्यार्थियों को बेहतर स्लोगन और बेहतर फीड बैक देने के लिए 500-500 रुपये से पुरस्कृत किया गया।