कोलकाता में विपक्ष की महारैली में शरद यादव द्वारा राफेल की जगह बोफोर्स घोटाला(कांग्रेस शासन में लगे आरोप) बोल देने पर सियासी गलियारे में जुबानी जंग शुरू हो गई है। यह मुद्दा अब ट्वीट वार में बदल चुका है। पहले जहां भाजपा ने ट्वीट कर चुटकी ली थी, तो बाद में पीएम मोदी ने भी सच्चाई छिपाए नहीं छिपने की बात कह डाली। अब मामले में शरद यादव की सफाई सामने आई है।
पीएम ने कहा, 'ये कार्यकर्ता ही हैं, जिनकी मेहनत से इतने कम समय में भाजपा 2 से 282 सीट तक पहुंची। पिछले कई महीनों से देश के अलग-अलग स्थानों के कार्यकर्ताओं से मेरा 'नमो एप' के माध्यम से बातचीत हुई है। कार्यकर्ताओं के संघर्ष, पार्टी और देश को आगे ले जाने के लिए रात दिन एक करने की तैयारी देख कर बहुत संतोष होता है। महाराष्ट्र के कार्यकर्ताओं की बात करूं तो उन्होंने पिछले 4-5 साल में बहुत मेहनत की है। हमारे कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र के लोगों का विश्वास जीतने का अभूतपूर्व कार्य किया है, जिससे यहां भाजपा का इतना अधिक विस्तार हुआ है।'
महागठबंधन को पीएम मोदी ने नामदारों का गठबंधन बताते हुए कहा, ये महागठबंधन एक अनोखा बंधन है। ये बंधन नामदारों का बंधन है। ये बंधन भाई-भतीजेवाद का बंधन है। ये बंधन भ्रष्टाचार और घोटालों का बंधन है। ये बंधन नकारत्मकता का बंधन है। ये बंधन अस्थिरता और असमानता का बंधन है।
गरीबों को आरक्षण कानून को चुनाव से पहले लागू करने पर सफाई देते हुए पीएम ने कहा कि जब जनता के व्यापक हित में हमने ऐसा ऐतिहासिक फैसला लिया है, तो राजनीतिक पार्टियों का विरोध या फिर उनकी ऐसी चालें स्वाभाविक हैं। जो लोग मुझे कहते हैं कि मैंने ये फैसला चुनाव के लिए किया, तो मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि देश में चुनाव कब नहीं होते? इससे पहले ये फैसला करता, तो लोग बोलते कि पांच राज्यों के चुनाव में फायदे के लिए किया। उससे पहले करता, तो कहते कि कर्नाटक चुनाव के लिए किया।
किसानों को लेकर पीएम ने कहा कि 2022 तक उनकी आमदनी दोगुनी हो, इसके लिए भाजपा की सरकार में बीज से बाजार तक फैसले लिए जा रहे हैं। फसल चक्र के हर चरण के दौरान किसानों को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पूरे फसल ईको-सिस्टम को किसानों के लिए हितकारी बनाने का काम हो रहा है। इसके लिए हमारी केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिलकर काम कर रही है। इसी का परिणाम है कि हमारे महाराष्ट्र की कृषि आज बदल रही है, संवर रही है। पहले की सरकारें 60-65 साल में महाराष्ट्र में मात्र 32 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई के दायरे में ला पाई थी। लेकिन, पिछले तीन साल में ही यह दायरा 32 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 40 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।