27 जनवरी को शुरू हुई ये नीलामी प्रक्रिया शनिवार की शाम को खत्म हुई। भारतीयों की ओर से नीलामी को बेहद अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश-विदेश से मिले लगभग दो हजार उपहारों की नीलामी 27 और 28 जनवरी को हुई। इन उपहारों की ऑनलाइन नीलामी 29 से 31 जनवरी तक की गई। संस्कृति मंत्रालय और नेशनल गैलरी ऑफ मार्डन आर्ट ने इसका आयोजन किया। इसके बाद बची हुई वस्तुएं www.pmmementos.gov.in पर उपलब्ध हुईं। इस दौरान करीब 1800 स्मृति चिन्हों की काफी ऊंची बोली लगी।
चलिए जानते हैं नीलामी से जुड़ी कुछ मुख्य बातें-
- राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय द्वारा आयोजित नीलामी में विशेष रूप से हाथ से बनी बाइक पर पांच लाख रुपये की बोली लगी।
- एक पेंटिंग जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक रेलवे प्लैटफॉर्म पर दिखाया गया है, की भी अच्छी बोली लगी। इस तस्वीर के जरिए पीएम मोदी का रेलवे से जुड़ाव दिखाया गया है। ई-नीलामी के दौरान भी कई सामानों पर अच्छी बोली लगाई गई।
- भगवान शिव की एक मूर्ति की न्यूनतम कीमत पांच हजार रुपये है, इसकी नीलामी 10 लाख रुपये में हुई है। जो कि इसकी वास्तविक कीमत से 200 गुना अधिक है।
- अशोक स्तंभ की लकड़ी की एक प्रतिकृति की न्यूनतम कीमत 4 हजार रुपये है। इसकी नीलामी 13 लाख रुपये में हुई।
- एक पारंपरिक होराई जो असम के माजुली से मिली है (असम राज्य का एक पारंपरिक प्रतीक- एक स्टैंड के साथ ट्रे भेंट की जाती है) जिसकी न्यूनतम कीमत 2 हजार रुपये है, इसकी नीलामी 12 लाख रुपये में हुई।
- एसजीपीसी, अमृतसर से प्राप्त "दिव्यता" का स्मृति चिन्ह, जिसकी न्यूनतम कीमत 10 हजार रुपये है, की नीलामी 10.1 लाख रुपये में हुई।
- गौतम बुद्ध की प्रतिमा जिसकी न्यूनतम कीमत 4 हजार रुपये है, की नीलामी 7 लाख रुपये में हुई है।
- शेर की एक पारंपरिक पीतल की मूर्ति की नीलामी 5.20 लाख रुपये में हुई है। ये मूर्ति प्रधानमंत्री मोदी को नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री श्री सुशील कोइराला ने दी थी।
- 10 हजार रुपये की न्यूनतम कीमत वाले चांदी के कलश की 6 लाख रुपये में नीलामी हुई है।
- बहुत से स्मृति चिन्हों की नीलामी उनकी न्यूनतम कीमत से कई गुना अधिक मूल्य पर हुई है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी स्मृति चिन्हों की नीलामी की थी। ताकि लड़कियों की शिक्षा के लिए धनराशि मिल सके। पीएम मोदी ने यही तरीका फिर से अपनाया है ताकि पवित्र नदी गंगा की स्वच्छता के लिए फंड एकत्रित हो सके।