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Mehul Choksi: क्या अब भारत लाया जाएगा भगोड़ा कारोबारी मेहुल चोकसी; कहां, क्यों, कब और कैसे हुआ गिरफ्तार?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 14 Apr 2025 03:53 PM IST

सार

मेहुल चौकसी कौन है? चोकसी किस मामले में आरोपी है? उससे जुड़ा पूरा मामला क्या है? इसमें कब-कब क्या हुआ? चोकसी बीते सात साल में कहां-कहां रहा? बेल्जियम में उसकी गिरफ्तारी क्यों हुई? और उसे भारत वापस कैसे लाया जा सकता है? आइये जानते हैं...
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मेहुल चोकसी। - फोटो : ANI
भारत के भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी को सोमवार सुबह बेल्जियम से गिरफ्तार किया गया है। चोकसी बीते करीब सात साल से भारतीय एजेंसियों की पकड़ से दूर है। चोकसी की गिरफ्तारी के बाद  यह चर्चा है कि क्या 26/11 हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा के बाद चोकसी का प्रत्यर्पण भी कर सकता है? 

मेहुल चौकसी कौन है? चोकसी किस मामले में आरोपी है? उससे जुड़ा पूरा मामला क्या है? इसमें कब-कब क्या हुआ? चोकसी बीते सात साल में कहां-कहां रहा? बेल्जियम में उसकी गिरफ्तारी क्यों हुई? और उसे भारत वापस कैसे लाया जा सकता है? आइये जानते हैं...
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मेहुल चोकसी। - फोटो : ANI
भारत के भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी को सोमवार सुबह बेल्जियम से गिरफ्तार किया गया है। चोकसी बीते करीब सात साल से भारतीय एजेंसियों की पकड़ से दूर है। चोकसी की गिरफ्तारी के बाद  यह चर्चा है कि क्या 26/11 हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा के बाद चोकसी का प्रत्यर्पण भी कर सकता है? 

मेहुल चौकसी कौन है? चोकसी किस मामले में आरोपी है? उससे जुड़ा पूरा मामला क्या है? इसमें कब-कब क्या हुआ? चोकसी बीते सात साल में कहां-कहां रहा? बेल्जियम में उसकी गिरफ्तारी क्यों हुई? और उसे भारत वापस कैसे लाया जा सकता है? आइये जानते हैं...

मेहुल चोकसी से जुड़ा मामला क्या है?

  • मेहुल चोकसी का नाम पहली बार 2018 में सामने आया, जब एक विशेष पीएमएलए कोर्ट ने चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी और नीशल मोदी के खिलाफ एक गैर-जमानती वारंट जारी किया। 
  • आरोप है कि नीरव और मेहुल ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर बैंक को करीब 13,000 करोड़ रुपये का चूना लगाया। यह बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला कहा जाता है।
  • इन लोगों ने पीएनबी की मुंबई के फोर्ट में स्थित ब्रेडी हाउस ब्रांच के अधिकारियों की मदद से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (LoU) के जरिए बैंक से कर्ज पर रकम लेकर विदेशों में ट्रांसफर की। 
  • आरोपियों ने फर्जीवाड़े से LoU की अवधि एक साल तक दिखाई और महंगे आभूषणों का आयात किया, जबकि रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस के मुताबिक, इनकी अवधि 90 दिन ही हो सकती है, जिसके बाद कर्ज वापसी जरूरी है।
  • भारतीय बैंकों की विदेश में मौजूद शाखाओं ने आरबीआई के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया। वे ऐसे दस्तावेज मुहैया कराने में नाकाम रहे, जिसके जरिए विदेश में उनसे कर्ज हासिल किया गया। 
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बेल्जियम में क्यों गिरफ्तार हुआ मेहुल चोकसी?

  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेहुल चोकसी ने बेल्जियम में निवास कार्ड पाने के लिए जाली दस्तावेज जमा किए। भारत ने इसे लेकर यूरोपीय देश को आगाह भी किया। बताया गया कि चौकसी ने यह भी छिपाया कि वह भारत और एंटीगुआ का नागरिक है। 
  • इससे पहले फरवरी में चोकसी के वकील ने मुंबई की एक अदालत को बताया था कि वह भारत नहीं लौट सकता, क्योंकि वह रक्त कैंसर के इलाज के लिए बेल्जियम में था। 
  • भगोड़े कारोबारी ने कहा था कि वह भारतीय एजेंसियों के साथ सहयोग करने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालतों में पेशी के लिए तैयार है। हालांकि, इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया और एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण की दिशा में काम करती रहीं।
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मेहुल चोकसी को बेल्जियम से भारत कैसे लाया जा सकता है?

भारत और बेल्जियम के बीच प्रत्यर्पण संधि है। इस संधि के तहत हत्या, धोखाधड़ी, जालसाजी जैसे कई अपराधों के अभियुक्तों को एक देश से दूसरे देश भेजने का अहम माध्यम है। 2020 में केंद्रीय कैबिनेट ने संधि में कुछ बदलाव भी किए थे।

किन शर्तों पर हो सकता है प्रत्यर्पण?
संधि के मुताबिक, "किसी भी स्थिति में नागरिकों या निवासियों को तब तक नहीं सौपा जा सकता, जब तक किया गया अपराध दोनों देशों के कानून के हिसाब से प्रत्यर्पण लायक जुर्म नहीं है।" सीधे शब्दों में समझें तो किसी व्यक्ति को तभी प्रत्यर्पित किया जा सकता है, जब उसके द्वारा किया गया काम भारत और बेल्जियम दोनों देशों में अपराध की श्रेणी में आता हो। 



क्या दूसरे देश के नागरिकों का भी हो सकता है प्रत्यर्पण?
मेहुल चोकसी ने 15 जनवरी 2018 को एंटीगुआ की नागरिकता की शपथ ले ली थी। उसके भारतीय नागरिकता त्यागने को लेकर ज्यादा जानकारी मौजूद नहीं है। वहीं, मौजूदा समय में वह बेल्जियम का निवासी है। ऐसे में यह पूरी तरह बेल्जियम का अधिकार होगा कि वह चोकसी को भारत प्रत्यर्पित करता है या नहीं।

क्या बेल्जियम प्रत्यर्पण से मना कर सकता है?
संधि की एक खास बात यह भी है कि अगर प्रत्यर्पण की मांग राजनीतिक कारणों से की जा रही है तो इस मांग को नकारा जा सकता है। इसके अलावा सैन्य, भेदभाव व अन्य तर्कों और तथ्यों के आधार पर भी प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है। इसके अलावा अगर किसी अपराध के लिए भारत में मौत की सजा दी जा सकती है, तो बेल्जियम प्रत्यर्पण से पहले ऐसी किसी सजा को न देने का समझौता कर सकता है। हालांकि, चोकसी के मामले में यह तथ्य लागू नहीं होता। 

भारत और बेल्जियम ने 2023 में आपसी कानूनी सहयोग संधि (MLATs) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत दोनों देश भगोड़े आरोपियों के खिलाफ जांच एजेंसियों की तरफ से जारी एक-दूसरे के सर्च वॉरंट और समन को प्रभावी कर सकते हैं।
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