मेघालय के डीजीपी एलआर बिश्नोई।
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गोल्डन ट्राएंगल जो म्यांमार, लाओस और थाईलैंड का हिस्सा है - भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में ड्रग्स के उत्पादन और आपूर्ति का स्रोत बन गया है। गोल्डन ट्राएंगल से चल रहे ड्रग्स नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म करने पर हम अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसके लिए मेघालय पुलिस पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के पुलिस के साथ मिलकर काम कर रही है। मेघालय के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एलआर बिश्नोई ने अमर उजाला से खास बातचीत में यह बात कही।
डीजीपी ने कहा, गोल्डन ट्राएंगल क्षेत्र अफीम की खेती का केंद्र है। इसका मुख्य क्षेत्र म्यांमार के लॉर्ड्स के पास है। नशीले पदार्थ तस्कर भारत में मॉर्फिन और हेरोइन के लिए मणिपुर और नागालैंड के साथ म्यांमार मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। बाद में, इसे कोहिमा, दीमापुर और गुवाहाटी के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों और भारत के अन्य हिस्सों में भेजते हैं।
बिश्नोई ने कहा, गोल्डन ट्राएंगल से चल रहे ड्रग्स नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म करना बहुत जरूरी है। आने वाले समय में यहां से नशे का कारोबार और बढ़ेगा। यह केवल पूर्वोत्तर तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे देश में फैल सकता है।
डीजीपी ने कहा, "युवा देश की भविष्य हैं और हमारा सबसे पहला प्रयास होगा कि हम युवाओं को नशे के जाल में फंसने से बचाएं। इसके लिए मेघायल पुलिस लगातार युवाओं को नशे के खिलाफ अभियान में से जोड़ रही है। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जागरुकता अभियान चला रही है। पिछले कुछ ही समय में मेघालय पुलिस ने 300 से अधिक जागरूरता अभियान चलाया, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया।"