मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले की अवैध खदान में 15 मजदूरों को फंसे हुए 15 दिन का समय बीत चुका है। सभी को अब तक खदान से निकाला नहीं निकाला जा सका है। उन्हें बाहर निकालने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम लगातार कोशिशे कर रही हैं। इस बीच फाइनली कोल इंडिया को राज्य सरकार द्वारा 20 दिसबंर को भेजा गया सहायता अनुरोध मिल गया है। उत्तर पूर्वी कोयला खदानों के महाप्रबंधक जेके बोरा ने कहा कि कोल इंडिया के अध्यक्ष को शषिलांग से मदद का अनुरोध बुधवार देर शाम को मिला।
बोरा के अनुसार 'मेघालय सरकार ने 10 पंप, पाइप्स, सर्वे के लिए मदद और जरूरत पड़ने पर दूसरी तकनीकी सहायता मांगी है।' बोरा ने कहा, 'कोल इंडिया पहले से ही आसनसोल, धनबाद, बिलासपुर और दूसरे क्षेत्र से संसाधनों को जुटा रहा है। देखते हैं कि हम कितने अतिरिक्त संसाधन जुटा सकते हैं। हम जितना हो सकेगा उनकी मदद करने की कोशिश करेंगे।' उन्होंने कहा कि पहले साइट का मूल्यांकन किया जाना चाहिए जिसके लिए वह कल मेघालय रवाना होंगे। समन्वय के लिए एक कंट्रोल रुम बनाया जाएगा।
इससे पहले बुधवार को कोल इंडिया लिमिटेड ने कहा था कि उन्हें मेघालय सरकार से मदद के लिए कोई अनुरोध अब तक नहीं मिला है। वहीं इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को एनडीआरएफ के गोताखोर जोकि सर्च ऑपरशेन कर रहे हैं उन्होंने दुर्गंध की सूचना दी।
एनडीआरएफ के सहायक कमांडेंट संतोष सिंह जोकि बचाव दल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं उन्होंने कहा, 'यह अच्छा संकेत नहीं है।' उन्होंने आगे किसी भी तरह की टिप्पणी करने से मना कर दिया। एनडीआरएफ के जवानों का कहना है कि दुर्गंध इस बात का संकेत हैं कि खनिकों की मौत हो चुकी है और उनके शवों ने सड़ना शुरू कर दिया है।
मजदूर 13 दिसंबर को चूहे के जैसे छेद वाली खदान में उस समय फंस गए थे जब पास की लितेन नदी से आया पानी उसके अंदर भरने लगा। जहां अभी तक खदान के अंदर का जलस्तर कम नहीं हुआ है। वहीं बचाव दल ने सोमवार से पानी को बाहर निकालना बंद कर दिया है क्योंकि 25 हॉर्सपावर वाले पंप अप्रभावी साबित हुए हैं। एनडीआरएफ ने जिला प्रशासन से कम से कम 100 हॉर्सपावर वाले पंप मांगे हैं।
एनडीआरएफ के अनुरोध को राज्स सरकार के पास भेजा गया है लेकिन अभी तक इसपर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एनडीआरएफ के 70 और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के 22 जवान स्थल पर मौजूद हैं। पिछले 14 दिनों में केवल तीन हेल्मेट मिले हैं। बचाव अधिकारियों का कहना है कि उन्हें फंसे हुए मजदूरों के स्टेटस और उनकी उपस्थिति के बारे में कोई भी जानकारी नहीं मिल पा रही है। बुधवार शाम को एनडीआरएफ के तीन गोताखोरों को पानी का स्तर जांचने के लिए खदान में भेजा गया था।
वर्तमान में खदान के अंदर 70 फीट गहराई तक पानी है। सिंह ने उन्हें कहा, 'कृपया देखें कि क्या पानी का स्तर कुछ कम हुआ है। मुझे नहीं लगता कि पम्पिंग के बिना यह कम हो सकता है। पानी की सुगंध को देखिए और यह भी कि क्या आपको सतह पर कुछ तैरता हुआ नजर आ रहा है।' क्रेन के जरिए जवानों को खदान के अंदर भेजा गया। 15 मिनट बाद उन्होंने सीटी बजाई तो उन्हें बाहर निकाला गया। गोताखोरों ने सिंह को पहली बार दुर्गंध आने की सूचना दी।