पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में 27 फरवरी को होने वाले चुनावों में भाजपा भले जीत कर सरकार बनाने के दावे करे, लेकिन यहां सत्ता की चाबी तो क्षेत्रीय दलों के पास ही है। चुनावों के बाद सरकार के गठन में इन क्षेत्रीय दलों की भूमिका निर्णायक रहने की संभावना है।
पूर्वोत्तर राज्यों में कांग्रेस की पकड़ में आई कमी के बाद इलाके में क्षेत्रीय पार्टियां मजबूत हुई हैं। ऐसे राज्यों में मेघालय भी प्रमुख है। यहां भले बीते 10 साल से कांग्रेस सत्ता में हो, उसे इस बार क्षेत्रीय दलों से कड़ी चुनौती मिल रही है।
यहां कांग्रेस और मुख्यमंत्री मुकुल संगमा को सबसे कड़ी चुनौती पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा की स्थापित नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) की ओऱ से मिल रही है। इसकी कमान फिलहाल संगमा के पुत्र कानराड संगमा के हाथों में है। 2013 के विधानसभा चुनावों में एनपीपी के महज तीन विधायक जीते थे। लेकिन उसके बाद कोनराड ने पार्टी को बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है।
बीती जनवरी में कांग्रेस के पांच विधायक भी एनपीपी में शामिल हो गए थे। एनपीपी का दावा है कि इस बार राज्य में वही सरकार बनाएगी। कोनराड संगमा ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी यहां भाजपा के साथ हाथ नहीं मिलाएगी। हालांकि मणिपुर में वह भाजपा के साथ है।