प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद राजनीति और माफिया का ऐसा गठबंधन है कि लाख कोशिश के बावजूद अवैध कोयला खनन पूरी तरह से बंध नहीं हो सका है। बीच-बीच में अवैध खनन में लोगों के मारे जाने की खबरें भी आती हैं लेकिन अधिकतर खबरों को खदानों में ही दबा दिया जाता है। अवैध खनन जारी रहने से नाराज और इसे रोकने में नाकाम रहने के बाद, मेघालय उच्च न्यायालय को अब इसकी निगरानी के लिए केंद्रीय सशस्त्रबलों को लगाने के आदेश जारी करने पड़े।
उल्लेखनीय है कि एजीटी ने अवैज्ञानिक तरीके से हो रहे कोयला खनन पर 2014 से प्रतिबंध लगाया रखा है। उल्लेखनीय है कि 2018 में भी मेघालय का मुख्य चुनावी मुद्दा कोयला खनन पर ही केंद्रित था। इस बार भी मेघालय विधानसभा चुनाव का मुख्य केंद्र बिंदु कोयला ही है। अगर बात करें जयंतिया हिल्स की तो यहां की क्षेत्रीय पार्टी हो या फिर राष्ट्रीय पार्टी हर किसी का चुनावी मुद्दा कोयला है। कुछ उम्मीदवार जो खुद कोयला खानों के मालिक हैं, वे चुनाव में केवल इसलिए खड़े हैं कि कोयला खनन की प्रक्रिया पह जो प्रतिबंध एनजीटी ने लगाए हैं, उसे उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकें।
भाजपा ने की है टास्क फोर्स बनाने की घोषणा
मेघालय के ज्यादातर उम्मीदवार कोयला खनन के व्यापार से जुड़े हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक मेघालय में लगभग 24,000 खदानें हैं, जिसमें से ज्यादातर अवैध रूप से चल रही हैं। 2019 में सर्वोच्च न्यायालय ने अवैध कोयला खनन रोकने में असफल रहने के लिए मेघालय सरकार पर 100 करोड़ का जुर्माना लगाया था। भाजपा ने इस बार चुनावी घोषणा पत्र में मेघालय में कोयला के अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए अलग-अलग- टास्क फोर्स लगाने की घोषणा की है।
सांसद कर चुके हैं ‘रैट-होल’कोयला खनन को वैध बनाने की मांग
मेघालय से राज्यसभा सदस्य डब्ल्यूआर खारलुखी ने पिछले वर्ष कोयले के रैट होल खनन को वैध बनाने की मांग करते हुए पूछा था कि इस पर निर्भर लोग नीतिगत विफलताओं का खामियाजा क्यों भुगतें। उन्होंने कहा, वह पर्यावरण पर ‘रैट-होल खनन के नकारात्मक प्रभावों से अवगत हैं, लेकिन यह देखने की जरूरत है कि अधिक महत्वपूर्ण क्या है-मानव जीवन या अन्य चिंताएं।
50 प्रतिशत उम्मीदवार करोड़पति
स बार मेघालय चुनाव में कुल 375 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिसमें से 186 करोड़पति हैं। 2018 में यह आंकड़ा 41% था। इस बार मेघालय विधानसभा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 5.91 करोड़ रुपये है। 2018 में यह आंकड़ा 3.54 करोड़ रुपये था। राज्य में 27 फरवरी को मतदान होगा। चुनाव नतीजों का ऐलान 2 मार्च को होगा।