एक टीवी इंटरव्यू में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी इस मामले पर सवाल पूछा गया। निर्मला ने अकबर के मामले पर बोलने के लिए खुद को सही व्यक्ति नहीं बताया, लेकिन उन्होंने यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाओं का समर्थन किया। निर्मला ने कहा, जो भी महिलाएं इस स्थिति से गुजरी हैं, उनका बहुत बुरा अनुभव रहा होगा। इस वजह से वे अपने साहस से आगे आई हैं, जिसका मैं समर्थन करती हूं।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी अकबर के मामले पर स्पष्ट तौर पर बोलने से इनकार किया, लेकिन उन्होंने मी टू अभियान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, मैं किसी एक के मामले पर नहीं बोलूंगी। लेकिन इतना कहूंगी कि मी टू अभियान का बहुत बड़ा लाभ हुआ है। काम की जगह पर महिलाएं सुरक्षित हो गई हैं। पहले काम की जगह या सार्वजनिक स्थानों पर अभद्रता होने के बाद महिलाएं संकोच में बोल नहीं पाती थीं, लेकिन अब वह संकोच टूट गया है।
भाजपा का थिंकटैंक कहे जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने बृहस्पतिवार को मी टू अभियान का समर्थन किया। दत्तात्रेय ने अपने ट्विटर अकाउंट पर फेसबुक की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर आंखी दास की पोस्ट शेयर करते हुए अपना समर्थन जाहिर किया।
दास ने अपने पोस्ट में कहा था, आपको किसी पीड़ित महिला पत्रकार का समर्थन करने के लिए मी टू अभियान की आवश्यकता नहीं है। न आपको महिला होने की आवश्यकता है। आपको महज सही और गलत की समझने की आवश्यकता है। दत्तात्रेय ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, मैं इसे पसंद करता हूं। इन्होंने ठीक वही लिखा है, जो मैं महसूस करता हूं।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद बृहस्पतिवार को विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर पर मी टू अभियान के तहत लगे आरोपों पर पूछे गए सवालों का जवाब देने से कतराते दिखाई दिए। उधर, कोलकाता में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अकबर सरकार का हिस्सा हैं और इस मामले में सरकार को ही निर्णय लेना है।
हालांकि तीन दिन पहले मी टू अभियान को गलत ठहराने वाले भाजपा सांसद उदित राज ने बृहस्पतिवार को फिर एक सवाल उठाया। उदित राज ने पूछा कि यदि किसी आदमी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला की शिकायत गलत साबित हो गई तो उस आदमी की प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान का क्या होगा?
इससे पहले केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने स्पष्ट तौर पर अकबर के मामले की जांच कराए जाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। जो मर्द बड़े पद पर होते हैं, वे अक्सर ऐसा करते हैं। यह मीडिया, राजनीति और अन्य कंपनियों पर भी लागू होता है। हमें आरोपों को गंभीरता से लेना चाहिए। जब मामले खुलने लगे हैं तो हमें हर मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।