मीडिया जानबूझकर शाहीन बाग, धार्मिक उन्माद से भरे भाषण का अंश या हिन्दू-मुसलमान दिखा रही है। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय का कहना है कि चाहे गृहमंत्री अमित शाह का भाषण हो या भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का वह केवल शाहीन बाग पर ही नहीं बोलते। भाजपा के नेता अपने भाषण में 20 मिनट केवल केजरी सरकार की नाकामी पर बोलते हैं। इसके बाद वह केन्द्र सरकार के कामकाज को गिनाते हैं। केन्द्र सरकार का कामकाज बताने के बाद वह दिल्ली के विकास की रुपरेखा के बारे में बताते हैं और अंत में शाहीन बाग, जामिया, जेएनयू, टुकड़े-टुकड़े गैंग जैसे विषय पर आते हैं। मालवीय का कहना है कि मीडिया को अन्य अंश से कोई खास लेना-देना नहीं होता। वह सीधे शाहीन बाग पर चली आती है। अब इसमें भाजपा का क्या दोष है?
मालवीय फिर अपनी बात रखते हैं। वह कहते हैं कि मीडिया शाहीन बाग पर पहले फोकस इसलिए करती है, क्योंकि लोग वहीं सुनना, जानना, समझना चाहते हैं। अमित का कहना है कि लोगों को जनता का यह मूड समझना चाहिए। लोगों को देखना चाहिए कि केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के देश के गद्दारों का नारा बोलते हैं, लेकिन जवाब में जनता गोली मारने की बात बोल रही है। क्योंकि जनता देश में राष्ट्रीयता पर चोट करने वालों से तंग आ चुकी है। मालवीय के अनुसार भाजपा के नेता प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने क्या कहा? मालवीय के अनुसार मीडिया बिना पूरा सच दिखाए अपने हिसाब से पेश कर रही है।
अमित मालवीय का कहना है कि अरविंद केजरीवाल की सरकार ने दिल्ली की 300 मस्जिदों के इमामों को 18 हजार प्रतिमाह, उनके दो सहायकों को 16-16 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दे रही है। इस तरह से साल मेंं 19.44 करोड़ रुपये मस्जिदों के इमाम और उनके सहायक को मिल रहे हैं। जवाब में मंदिरों के पुजारियों, गुरुद्वारा के ग्रंथियों को क्या दे रही है? यह भेदभाव क्यों? अमित मालवीय का कहना है कि हिन्दू देश का बहुसंख्यक है। उसके साथ इस तरह का बर्ताव? यह मुद्दा नहीं है? क्या भाजपा के नेता ऐसे मामले को जनता के बीच में न ले जाएं? चुनाव के दौरान हम इसे जनता के बीच में न बोलें...तुष्टीकरण के इस प्रयास को न उठाएं? फिर जब ले जाते हैं और जनता के बीच में अपनी बात रखते हैं तो मीडिया उसे सांप्रदायिक राजनीति का रंग देने लगती है।
शाहीन बाद मुद्दा है। जामिया, जेएनयू, टुकड़े-टुकड़े गैंग भी मुद्दा है। अमित मालवीय का कहना है कि इन मुद्दों को जनता के बीच में उठना से कहां से गलत है? उन्होंने कहा कि यह अफसोस की बात है कि भाजपा नेताओं के बोल लोगों को याद रहते हैं, लेकिन जो शाहीन बाग में नारा लग रहा है, वह लोगों को याद नहीं है। वहां प्रधानमंत्री के लिए नारा लगता है कि ....हिटलर की मौत मरेगा। आखिर यह क्या है? तपन घोष जैसे लोग इतना भड़काऊ भाषण क्यों देते हैं? वैसे भी सरकार ने कई बार साफ किया है कि सीएए नागरिकता देने का कानून है, लेने का नहीं। फिर भी लोग क्यों इस तरह से प्रदर्शन कर रहे हैं। शाहीन बाग के मंच से भड़काऊ नारा लग रहा है।
अमित मालवीय का कहना है कि 15 दिसंबर से शाहीन बाग में महिलाएं बच्चों के साथ प्रदर्शन कर रही हैं। वहां बिरयानी और खाना बंट रहा है। वाटर प्रूफ टेंट लगा है। जमीन पर दरी गद्दे बिछाए गए हैं। आखिर इन सबकी फंडिग कौन कर रहा है? इस प्रदर्शन का खर्चा कहां से आ रहा है? मीडिया और देश के एक खास वर्ग की दिलचस्पी इस तरह के तथ्यों पर नहीं है। मालवीय का कहना है कि इस तरह के प्रदर्शन की शुरू से दिशा देखिए, मुद्दे देखिए और लोगों की मांग देखिए। इसके लिए केवल भाजपा को दोष देना ठीक नहीं है।