बच्चों के खिलाफ हिंसा एक त्रासदी है और यह पूरे विश्व में फैली हुई है। भारत में करीब हर घंटे चार बलात्कार होते हैं और आठ बच्चों के गायब होने के मामले सामने आते हैं। बच्चे न घर में सुरक्षित हैं और न बाहर। बाल यौन शोषण की बात करें या फिर उत्पीड़न की यह भारत में महामारी की तरह फैला हुआ है। आंकड़ों पर नजर डालें तो हर 4 में से एक लड़की और 6 में से 1 लड़का 18 वर्ष का होने से पहले यौन हिंसा का शिकार होता है।
पिछले 30 सालों से बाल अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे सोशल एक्टिविस्ट और नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने मंगलवार को कहा कि अब समय आ गया है कि समाज बलात्कारियों के खिलाफ आवाज उठाए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए धर्मगुरू आगे आएं। धर्म गुरू आगे आकर ऐलान करें कि बलात्कारियों को धर्म से बाहर निकाल दिया जायेगा।
'कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन' द्वारा आयोजित मीडिया की कार्यशाला में कैलाश सत्यार्थी ने कहा "बच्चों के प्रति बढ़ते अपराध और बलात्कार की घटनाएँ रोकने का काम सिर्फ पुलिस, गैर-सरकारी संगठन और न्यायपालिका नहीं कर सकती अब समय आ चुका है कि इसके लिए धर्मगुरू आगे आएं। उन्हें मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों से यह घोषणा करनी होगी कि यदि किसी ने इस तरह का घिनौना काम किया तो उसे बिरादरी ही नहीं धर्म से भी बाहर निकाल दिया जायेगा।"
बाल अपराध और बाल मजदूरी सामाजिक और सांस्कृतिक समस्या है
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उन्होंने बाल अपराध से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे के लिए जिला स्तर पर विशेष अदालतों के गठन और एक राष्ट्रीय बाल प्राधिकरण बनाने की अपनी मांगें भी दोहराई। उन्होंने कहा कि ये दोनों मांगें पूरी होने पर कानून और उसके क्रियान्वयन में बाधा बन रही संस्थागत कमी की खाई पट जायेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान 3P पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें प्रोफेसन, परपस और पैशन को साथ लेकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि मीडिया और न्यायपालिका की सोच सरकार और पूरी राजनीतिक व्यवस्था की सोच से कहीं आगे है। मीडिया को अपना रुख पेशेवराना रखना होगा तथा पूरी लगन के साथ एक ध्येय के लिए काम करना होगा। उन्होंने कहा कि हम आज जहां हैं वह सिर्फ पत्रकारिता की वजह से हैं। वहीं फॉलोअप स्टोरी पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अगर मीडिया किसी एक मामले के पीछ पड़ जाए तो उसपर समाधान भी जल्दी निकल आता है।
बाल अपराध और बाल मजदूरी को सामाजिक और सांस्कृतिक समस्या करार देते हुये सत्यार्थी ने कहा कि 38 साल पहले पंजाब में बंधुआ मजदूरों और उनके परिवारों समेत 36 लोगों को एक ईंट भट्ठे से छुड़ाने के साथ उन्होंने जो आंदोलन शुरू किया था वह मंजिल तक नहीं पहुंच सका है। उन्होंने कहा आज दो साल की, आठ महीने की बेटियों के साथ बलात्कार हो रहा है। स्कूलों में छह साल, आठ साल के लड़कों से दुष्कर्म किया जा रहा है। हर घंटे देश में चार बलात्कार होते हैं और आठ बच्चों के गायब होने के मामले सामने आते हैं।
सत्यार्थी ने कहा कि अदालतों में इन मामलों की त्वरित सुनवाई होनी चाहिये क्योंकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़े कहते हैं कि पॉस्को के तहत जो मामले लंबित हैं, यदि इसी रफ्तार से सुनवाई होती रही तो उनके निपटने में ही 50 साल लग जाएंगे।