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विदेश मंत्रालय ने कहा: तय नियमों के तहत जारी किया जाता है पासपोर्ट, देश में कितने फीसदी लोगों के पास दस्तावेज?

Tue, 14 Jul 2026 06:32 PM IST
Pavan एएनआई, नई दिल्ली

सार

विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आज कई अहम मुद्दों पर सरकार के मत स्पष्ट किए हैं। इस कड़ी में उन्होंने कहा कि भारतीय पासपोर्ट एक आधिकारिक दस्तावेज है, जिसे पासपोर्ट अधिनियम 1967 के तहत भारत सरकार जारी करती है। वहीं, निज्जर हत्या मामले पर कनाडा की पुलिस (आरसीएमपी) के बयान को लेकर उन्होंने कहा कि भारत ने इन टिप्पणियों पर ध्यान दिया है।
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रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कई अहम मुद्दों पर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने इस दौरान भारतीय पासपोर्ट, कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े आरोपों पर विस्तार से जानकारी दी। सबसे पहले पासपोर्ट को लेकर उन्होंने कहा कि भारतीय पासपोर्ट एक आधिकारिक दस्तावेज है, जिसे पासपोर्ट अधिनियम 1967 के तहत भारत सरकार जारी करती है। इसका उद्देश्य भारतीय नागरिकों की विदेश यात्रा को नियंत्रित करना है। पासपोर्ट जारी करने से पहले पूरी तरह जांच और तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है। उन्होंने बताया कि देश में अभी भी आठ प्रतिशत से कम लोगों के पास ही पासपोर्ट है।
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निज्जर मामले में कनाडा पुलिस के रुख पर क्या बोला MEA
निज्जर हत्या मामले पर कनाडा की पुलिस (आरसीएमपी) के बयान को लेकर उन्होंने कहा कि भारत ने इन टिप्पणियों पर ध्यान दिया है। ये बयान हाल ही में अमेरिका में सामने आए आरोपपत्र के अनुरूप हैं, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के सदस्यों को जिम्मेदार बताया गया है। भारत ने दोहराया कि वह आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
 

लॉरेंस बिश्नोई-गोल्डी बराड़ पर MEA की प्रतिक्रिया
इसके अलावा अमेरिका द्वारा लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी गोल्डी बराड़ पर आरोप लगाए जाने के सवाल पर एमईए ने कहा कि अमेरिका के न्याय विभाग की कार्रवाई और घोषणाओं को भारत ने देखा है। भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला संगठित अपराध, आतंकवाद, नशा तस्करी, मानव तस्करी और अवैध हथियारों का नेटवर्क समाज के लिए गंभीर खतरा है। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच इन मुद्दों पर मजबूत और लगातार बढ़ता सहयोग है। दोनों देशों की एजेंसियां कई वर्षों से मिलकर काम कर रही हैं और यह सहयोग आगे भी और मजबूत होता रहेगा। कुल मिलाकर, विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि भारत कानून व्यवस्था और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपनाए हुए है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
 

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पीओके में प्रदर्शन की वजह दशकों का शोषण- एमईए
भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की। भारत ने कहा कि वहां का यह गुस्सा पाकिस्तान की कई दशकों से चली आ रही नीतियों का नतीजा है, जिनमें लोगों का शोषण किया गया, उनके बुनियादी अधिकार छीने गए और इलाके का गलत तरीके से प्रशासन चलाया गया। रणधीर जायसवाल ने आगे कहा कि पाकिस्तान की सरकार ने प्रदर्शनकारियों की जायज मांगों को सुनने के बजाय उन पर ज्यादा बल प्रयोग किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और बच्चों तक के साथ सख्ती की गई, खाने-पीने की चीजों और दवाइयों जैसी जरूरी सप्लाई रोक दी गई, इंटरनेट बंद कर दिया गया और निहत्थे लोगों पर जानलेवा बल का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान से इन गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों और गलत कामों का जवाब मांगना चाहिए।

'कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत लाया जाएगा नीरव मोदी'
भारत सरकार ने मंगलवार को कहा कि भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन से भारत प्रत्यर्पित किया जाएगा, लेकिन यह मौजूदा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा कि इस मामले में कानूनी कार्यवाही अभी जारी है। उन्होंने कहा, 'कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित किया जाएगा'। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि फिलहाल कौन-सी कानूनी प्रक्रिया चल रही है। नीरव मोदी भारत में करीब 2 अरब डॉलर (लगभग 16,000 करोड़ रुपये) के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले से जुड़े धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में वांछित है। भारत लंबे समय से ब्रिटेन से उसके प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है। हाल ही में यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय ने नीरव मोदी की प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद उसके भारत लाए जाने की संभावना और मजबूत मानी जा रही है। नीरव मोदी को मार्च 2019 में ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह वहां की जेल में बंद है। ब्रिटेन की अदालतें पहले ही उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे चुकी हैं।
 
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