विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोमवार को एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग में म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के भारत दौरे पर जानकारी दी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, म्यांमार भारत का पड़ोसी देश है, जिसके साथ 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है। उन्होंने कहा, म्यांमार भारत की पड़ोसी पहले, एक्स ईस्ट, महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए नीतियों में अहम स्थान रखता है।
विदेश सचिव ने मीडिया को क्या बताया?
विक्रम मिस्री ने बताया कि म्यांमार के राष्ट्रपति के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। इस प्रतिनिधिमंडल में पांच कैबिनेट मंत्री, तीन उपमंत्री और कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा, एक बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल और म्यांमार-भारत मैत्री संघ के सदस्य भी उनके साथ आए हैं।
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'भारत-म्यांमार के बीच गहरे धार्मिक संबंध'
उन्होंने कहा, नई दिल्ली पहुंचने से पहले म्यांमार के राष्ट्रपति ने बोधगया का दौरा किया। वहां उन्होंने पूजा-अर्चना की और महाबोधि मंदिर, महाबोधि धम्मिका मठ तथा सुजाता मंदिर के दर्शन किए। विदेश सचिव ने कहा कि यह यात्रा भारत और म्यांमार के बीच गहरे बौद्ध एवं धार्मिक संबंधों को दर्शाती है। साथ ही यह दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत और दीर्घकालिक संबंधों को भी दर्शाती है।
पीएम मोदी के निमंत्रण पर भारत आए हैं ह्लाइंग
मिस्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर म्यांमार के राष्ट्रपति 30 मई से तीन जून 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा पर हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग को मूल रूप से अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन शिखर सम्मेलन में भाग लेना था। लेकिन अपरिहार्य कारणों से इस सम्मेलन को स्थगित करना पड़ा। ऐसे में इस अवसर का उपयोग भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा के लिए किया गया।
विदेश सचिव ने कहा, अप्रैल 2026 में पद संभालने के बाद यह म्यांमार के राष्ट्रपति की पहली विदेश यात्रा है। भारत पहला देश बना है, जहां का उन्होंने दौरा किया है। उन्होंने कहा कि म्यांमार भारत के लिए एक अहम देश है और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की जा रही है।
वहीं, म्यांमार के राष्ट्रपति ह्लाइंग ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आश्वासन दिया कि म्यांमार की जमीन का इस्तेमाल भारत की सुरक्षा के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने को लेकर व्यापक बातचीत हुई।