विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने आज नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया की पुस्तक 'द नेहरू डेवलपमेंट मॉडल' के विमोचन के मौके पर देश के प्रथम प्रधानमंत्री की नीतियों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 'नेहरू विकास मॉडल' ने अनिवार्य रूप से 'नेहरू विदेश नीति' को जन्म दिया। बकौल विदेश मंत्री जयंकर, जिस तरह भारत में नेहरू मॉडल के परिणाम सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं, उसी प्रकार सरकार विदेशों में भी इसे ठीक करना चाहती है।
द नेहरू डेवलपमेंट मॉडल' के विमोचन पर जयशंकर
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया की किताब द नेहरू डेवलपमेंट मॉडल के विमोचन के दौरान वर्चुअल संबोधन में जयशंकर ने कहा कि लेखक का मानना है कि नेहरू के विकल्पों ने भारत को एक निर्धारित रास्ते पर डाल दिया। उन्होंने बताया कि इस मॉडल और उससे जुड़ी विचारधारा ने राजनीति, प्रशासन, न्यायपालिका, मीडिया और शिक्षा तक को प्रभावित किया है।
जयशंकर ने कहा कि रूस और चीन दोनों ने आज उस समय के आर्थिक विचारों को स्पष्ट रूप से नकारा किया है, जिन्हें नेहरू ने बढ़ावा दिया था। फिर भी, ये विचार आज भी हमारे देश के प्रभावशाली वर्गों में जीवित हैं। उन्होंने कहा 2014 के बाद दिशा को सही करने के लिए कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन लेखक के अनुसार, यह एक कठिन कार्य है।
हरू विदेश नीति को जन्म दिया- जयशंकर
विदेश मंत्री ने आगे कहा नेहरू विकास मॉडल ने नेहरू विदेश नीति को जन्म दिया। हम विदेशों में इसे सही करना चाहते हैं, जैसे हम घर में मॉडल के परिणामों को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक विचार का विरोध दूसरे से जुड़ाव पर आधारित होता है, और इन दोनों को एक साथ देखा जाना चाहिए।
फोस्टर डलेस के बयान को किया उल्लेखित
जयशंकर ने अमेरिकी नीति निर्माता जॉन फोस्टर डलेस का 1947 में किया गया बयान उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय की सरकार को वह अधिक गलत नहीं कर सकते थे, लेकिन यह एक दावा था जिसे दशकों तक अमेरिकी नीति निर्माताओं ने सही माना। उन्होंने कहा कि मैने कई बार खुद से पूछा कि क्या डलेस पूरी तरह से गलत थे। पनगढ़िया की किताब में उन्हें इसका उत्तर मिला।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए विशेष आर्थिक मॉडल को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत वैचारिक प्रेरणा थी। उस विश्वास को समय-समय पर बदला गया, लेकिन कभी पूरी तरह से नहीं बदला गया। जयशंकर ने बताया कि इसका मूल कारण यह था कि साम्राज्यवाद का सामना करने के लिए समाजवाद ही एकमात्र रास्ता था और यह विचार भारी उद्योगों पर केंद्रित था। इसी कारण पनगढ़िया ने इसे नेहरू विकास मॉडल के रूप में परिभाषित किया।
आज की स्थिति पहले से अधिक जटिल- जयशंकर
हालांकि, अब तीन दशकों से यह साफ हो चुका है कि यह मॉडल भारत को सफल नहीं बना सका, लेकिन फिर भी सुधार करने की दिशा में संकोच है। विदेश मंत्री ने कहा कि परिणामस्वरूप, सुधार तो होते हैं, लेकिन वे हमेशा वही नहीं होते जो सच में चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि पिछले 33 वर्षों में भारत ने खुलेपन से फायदा उठाया है, लेकिन आज की स्थिति पहले से कहीं अधिक जटिल है।
जयशंकर ने कहा कि सावधानी से खुलापन एक बेहतर तरीका हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने आत्मनिर्भरता पर कहा कि इसे संरक्षणवाद के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और खुद से सोचने और काम करने का आह्वान है।