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PAK से आतंकवाद: घटनाओं में कमी नहीं भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करता रहा पड़ोसी; 26/11 के पीड़ितों को नहीं दी मदद

Sat, 12 Jul 2025 12:39 PM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की घटनाओं में कमी नहीं आई है। दहशतगर्दों के पनाहगाह पड़ोसी ने भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने में पूरी ताकत झोंकी। दरअसल,  विदेश मंत्रालय ने वर्ष 2024 की घटनाओं को लेकर एक वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक पड़ोसी देश ने मुंबई में करीब 16 साल पहले हुए 26/11 आतंकी हमले के पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद नहीं की।
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विदेश मंत्रालय (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद में कोई कमी नहीं आई है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित कई आतंकवादी और उनके संगठन पाकिस्तान में पनाह हासिल किए हुए हैं। बार-बार कहने के बावजूद पाकिस्तान ने अब तक 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कोई ईमानदारी नहीं दिखाई।

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विदेश मंत्रालय ने वर्ष 2024 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा, पाकिस्तान की ओर से फैलाया जा रहा सीमा पार आतंकवाद भारत के लिए मुख्य चिंता का विषय बना हुआ है। यही वजह है कि पाकिस्तान के सामान्य पड़ोसी संबंध चाहने के बावजूद नहीं बन पा रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, भारत लगातार यह कहता रहा है कि दोनों देशों के बीच के मुद्दों को द्विपक्षीय और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। लेकिन इसके लिए एक अनुकूल वातावरण जरूरी है जो आतंक, हिंसा और शत्रुता से मुक्त हो। हालांकि भारत को पाकिस्तान की ओर से लगातार सीमा पार आतंकवाद, शत्रुतापूर्ण और मनगढ़़ंत प्रचार का सामना करना पड़ रहा है।

मंत्रालय के अनुसार सैन्य-ग्रेड हथियारों, ड्रोनों, संचार उपकरणों और आतंकवादियों के घुसपैठ के लिए भूमिगत सुरंगों का उपयोग तथा नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारत में हथियारों और नशीले पदाथों की तस्करी स्पष्ट रूप से भारत के खिलाफ राज्य समर्थित आतंकवादी की मौजूदगी की ओर इशारा करती है।
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मंत्रालय ने दोनों देशों के बीच निष्क्रिय संबंधों के लिए पूरी तरह पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अगस्त 2019 में, पाकिस्तान ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को कमजोर किया है, जिसके कारण द्विपक्षीय व्यापार, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच आदान-प्रदान को निलंबित करना पड़ा है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों को उत्पीड़न भी गंभीर रूप से जारी है। भारत सरकार ने कई मौकों पर इन समूहों के के खिलाफ अत्याचारों का मुद्दा उठाया। भारत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के पूजा स्थलों और सांस्कृतिक विरासत तथा भेदभाव, हत्या, अपहरण, अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों का जबरन धर्म परिवर्तन करके विवाह करने के बारे में अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। इस रिपोर्ट में सिर्फ 2024 तक स्थिति का जिक्र है इसलिए इसमें इस वर्ष पहलगाम हमले और उसके बाद के घटनाक्रम का जिक्र नहीं है।

लगातार वार्ताओं के दौर से चीन से संबंध सुधारने में मिली मदद
विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन के साथ पिछले साल कई दौर की वार्ता ने कई लंबित मुद्दों को सुलझाने में मदद की । विदेश मंत्रालय की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट में मंत्रालय ने चीन को लेकर हुई कई दौर की बातचीत का भी ब्योरा दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन वार्ताओं में कैलाश मानसरोवर यात्रा बहाल करने, दोनों देशों के बीच नियमित उड़ानें आरंभ करने और नदियों का डाटा साझा करने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। रिपोर्ट में 2024 तक के घटनाक्रम का जिक्र है लेकिन इन वार्ताओं के फलस्वरूप इस वर्ष (2025 में) कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से बहाल हो चुकी है और नियमित उड़ानें शुरू करने पर भी सहमति बन चुकी है।

रिपोर्ट में कहा गया है, जून 2020 (गलवां घाटी में संघर्ष के बाद) से, भारत और चीन ने सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्यतंत्र की 18 और वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तर की 21 दौर की बैठकें कीं। वर्ष 2024 के मार्च और अगस्त में बीजिंग में और जुलाई और दिसंबर में नई दिल्ली में डब्ल्यूएमसीसी की चार दौर की बैठकें हुईं।  इन वार्ताओं से मिली सफलता के बाद दोनों देश अक्तूबर, 2024 में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त व्यवस्था को लेकर एक

समझौते पर सहमत हुए, जिससे लद्दाख में 2020 से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्तूबर, 2024 को 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर चीन के राष्टट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। करीब पांच वर्ष में प्रतिनिधिमंडल स्तर की इस पहली मुलाकात से दोनों देशों में संबंधों को सामान्य बनाने में बेहद मदद मिली। प्रधानमंत्री ने इस दौरान सीमा संबंधी मामलों में मतभेदों को रोकने पर बल दिया ताकि सीमा पर शांति और स्थिरता बनी रहे। दोनों नेताओं ने सीमा समस्या के समाधान और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने में विशेष प्रतिनिधि कार्यतंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया।

दोनों नेता इसपर भी सहमत हुए कि विदेश मंत्रियों और अन्य अधिकारियों के स्तर पर संवाद तंत्र का उपयोग द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर बनाने और पुनर्निर्माण करने के लिए किया जाएगा। शिखर नेताओं की बैठक से इतर विदेश मंत्री एस जशयंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से तीन मौकों पर मुलाकात कर संबंधों को सामान्य बनाने के लिए काम किया।

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