महाराष्ट्र की एक अदालत ने 2011 के मवाल गोलीकांड में मुकदमे का सामना कर रहे 185 किसानों को आरोप मुक्त करते हुए किसानों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने के राज्य सरकार के आवेदन को अनुमति दे दी। जिले के मवाल तहसील में नौ अगस्त, 2011 को एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में एक महिला समेत तीन किसानों की मौत हो गई थी और 16 अन्य किसान घायल हो गए थे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस एन सोनवणे ने 22 नवंबर को राज्य सरकार को इस मामले को वापस लेने की अनुमति देते हुए 185 किसानों को आरोप मुक्त कर दिया। उनपर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था जिनमें हत्या और दंगा करने के प्रयास का भी मामला दर्ज था।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, ‘आरोप पत्र पढ़ने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार ने जो कोई भी ब्योरा दिया है, उसके आधार पर कोई सार्थक नतीजा नहीं निकलेगा और आरोपियों के खिलाफ प्रत्यक्ष तौर पर कोई ठोस आरोप भी नहीं लगाए गए हैं।'
मवाल के पवना बांध से पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम क्षेत्र में पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने का सरकार ने निर्णय किया था और इस निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन उग्र होने पर पुलिस ने गोलियां चलाई थी। किसानों का दावा था कि अगर यह पाइपलाइन बिछाया जाता तो उन्हें फसल के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलेगा।