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SC: शाही ईदगाह विवाद में 15 जनवरी को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, HC ने मस्जिद समिति की याचिका की थी खारिज

Mon, 13 Jan 2025 07:01 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश की सर्वोच्च अदालत श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद मामले में मस्जिद प्रबंधन समिति की याचिका पर 15 जनवरी को सुनवाई करेगी। बता दें कि, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तरफ से मस्जिद समिति की याचिका खारिज कर दी गई थी।
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श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट 15 जनवरी को मथुरा, यूपी में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में याचिका खारिज करने के आदेश के खिलाफ मस्जिद प्रबंधन समिति की याचिका पर सुनवाई करेगा। पिछले साल 1 अगस्त को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने मथुरा में मंदिर-मस्जिद विवाद से संबंधित 15 मामलों की सुनवाई को चुनौती देने वाली प्रबंधन समिति, ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह की याचिका को खारिज कर दिया था और फैसला सुनाया था कि शाही ईदगाह के 'धार्मिक चरित्र' को निर्धारित करने की जरूरत है।
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पिछले साल 9 दिसंबर को मामले में अंतिम सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने पिछले साल 9 दिसंबर को मामले में अंतिम सुनवाई शुरू की और सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार यह मामला 15 जनवरी को पीठ के समक्ष आने वाला है। हिंदू पक्षों में से एक, जिसका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता बरुण सिन्हा ने किया था, ने तर्क दिया था कि मस्जिद समिति विवाद पर एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय जा सकती थी। उन्होंने कहा कि मस्जिद समिति की याचिका वर्तमान चरण में शीर्ष अदालत में सुनवाई योग्य नहीं है।

हाईकोर्ट के वकीलों ने क्या दिया तर्क
वकील ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के नियमों का हवाला दिया और तर्क दिया, 'इलाहाबाद उच्च न्यायालय के नियमों के अध्याय 8 के मद्देनजर, उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष एक विशेष अपील स्वीकार्य होगी।' उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय में अपील 'उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ के आदेश के खिलाफ स्वीकार्य नहीं है' और उच्च न्यायालय में एक अंतर-न्यायालय अपील दायर की जानी चाहिए थी। इसलिए वकील ने याचिका को खारिज करने की मांग की। पिछले साल 29 नवंबर को, सीजेआई के नेतृत्व वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की। सीजेआई ने कहा, 'हम इस पर विस्तार से सुनवाई करेंगे। हम इस पर 9 दिसंबर को दोपहर 2 बजे सुनवाई करेंगे... हमें तय करना है कि कानूनी स्थिति क्या है'।
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एक अंतर-न्यायालय अपील की जा सकती है- सुप्रीम कोर्ट
पीठ की ओर से बोलते हुए, सीजेआई ने प्रथम दृष्टया महसूस किया कि एकल न्यायाधीश पीठ के उच्च न्यायालय के 1 अगस्त के आदेश के खिलाफ एक अंतर-न्यायालय अपील की जा सकती है। पीठ ने कहा, 'हम निश्चित रूप से आपको बहस करने का अवसर देंगे।' मस्जिद समिति ने कहा कि कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और उससे सटी मस्जिद के विवाद पर हिंदू वादियों की तरफ से दायर किए गए मुकदमों ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम का उल्लंघन किया है और इसलिए वे विचारणीय नहीं हैं।

1991 का अधिनियम देश की स्वतंत्रता के दिन मौजूद किसी भी मंदिर के धार्मिक चरित्र को बदलने पर रोक लगाता है। हालांकि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को इसके दायरे से बाहर रखा गया था। हिंदू पक्ष की तरफ से दायर किए गए मामलों में औरंगजेब-युग की मस्जिद को 'हटाने' की मांग की गई है, उनका दावा है कि यह एक मंदिर के विध्वंस के बाद वहां बनाई गई थी।

या तो यह स्थान मंदिर है या मस्जिद- हाईकोर्ट
हाई कोर्ट ने कहा कि 1991 के अधिनियम में 'धार्मिक चरित्र' शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है और 'विवादित' स्थान का दोहरा धार्मिक चरित्र नहीं हो सकता है - एक मंदिर और एक मस्जिद, जो एक ही समय में 'एक दूसरे के प्रतिकूल हैं। उच्च न्यायालय ने कहा, 'या तो यह स्थान मंदिर है या मस्जिद। इसलिए, मुझे लगता है कि विवादित स्थान का धार्मिक चरित्र, जैसा कि 15 अगस्त, 1947 को था, दोनों पक्षों की तरफ से प्रस्तुत दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्यों से निर्धारित किया जाना चाहिए'।
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डल्लेवाल को चिकित्सा सहायता देने के मामले पर बुधवार को सुनवाई 
सुप्रीम कोर्ट किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल के स्वास्थ्य से संबंधित मामले और अन्य याचिकाओं पर 15 जनवरी को सुनवाई करेगा। डल्लेवाल अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ दल्लेवाल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करेगी। याचिका में केंद्र सरकार को कृषि कानूनों के निरस्त होने के बाद 2021 में प्रदर्शनकारी किसानों को फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी सहित एक प्रस्ताव लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

शीर्ष अदालत ने केंद्र से पूछा था कि सरकार यह क्यों नहीं कह सकती कि उसके दरवाजे खुले हैं और वह फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी सहित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों की वास्तविक शिकायतों पर विचार करेगी। शीर्ष अदालत पिछले साल 20 दिसंबर को डल्लेवाल को अस्पताल ले जाने के लिए जारी किए गए निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए पंजाब सरकार के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका पर भी सुनवाई करेगी। 12 जनवरी को डल्लेवाल ने कई धार्मिक नेताओं को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से किसानों की मांगों को स्वीकार करने का आग्रह किया, जिसमें फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी भी शामिल है। किसान नेताओं ने कहा कि डल्लेवाल की हालत 'बिगड़ती जा रही है', जिनका अनिश्चितकालीन अनशन 12 जनवरी को 48वें दिन का हो गया।
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