अरबों की जमीन पर ढाई साल से 2000 लोगों के साथ कब्जा जमाए बैठा रामवृक्ष यादव लोगों के मन में शासन प्रशासन के खिलाफ बगावत और नफरत के बीज बो रहा था। उन्हें भड़काने के साथ लालच भी देता और बाजार से कम दामों पर सामान बिकवाता था।
बाजार से 35 रुपये किलोग्राम के रेट पर चीनी खरीदकर पब्लिक को 25 रुपये में बेचता था। जब अंगूर 60 रुपये किलोग्राम थे, तब उसने 20 रुपये की दर पर बिकवाए। इसके बाद भी कब्जाधारियों के अलावा कोई और उसके जाल में नहीं फंसा।
वह खुद को नेताजी सुभाषचंद बोस का फालोअर बताता और बातें भी अटपटी करता था। एक रुपये में 60 लीटर डीजल मिलना चाहिए, सोना 12 रूपये किलो होना चाहिए, मुद्रा सोने की होनी चाहिए। आजाद हिंद फौज का सिक्का चलना चाहिए, ऐसे प्रवचन देता था।
सुबह को बाग में रोजाना उसका प्रवचन होता था। मथुरा के लोगों को अपने मिशन से जोड़ने के लिए उसने महंगाई को हथियार बनाया। वह कहता था कालाबाजी से चीजें महंगी बिक रही है। उसने सस्ते सामान की दुकानें भी कई बार खोलीं।
इन पर बाजार रेट से कम पर सामान देता था। जिस बाग को उसने कब्जा रखा था, उसके सारे फल तोड़कर वही बेचता था। यह कभी पार्क भी था, लोग सुबह की सैर पर इसमें आते थे लेकिन उसने कब्जा जमाने के बाद एंट्री पर बैन कर दिया। अगर कोई भूला-भटका पहुंच जाता तो रजिस्टर में उसकी एंट्री करता। खुद को बाग का मालिक बताता था।
जय गुरुदेव आश्रम में दाल नहीं गली तो बाग पर किया कब्जा
ramvriksha yadav mathura
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा-बरेली
रामवृक्ष यादव करीब चार साल पहले मथुरा आया था। तब उसका मकसद कुछ और था। वह बाबा जयगुरुदेव की गद्दी की विरासत हड़पना चाहता। उसने बाबा के आश्रम में जड़ जमाने की कोशिश की, लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद उसकी नजर गई उद्यान विभाग की अरबों की जमीन पर।
दरअसल, यह कलक्ट्रेट के पास में है। प्रशासन ने इसके एक हिस्से को धरनास्थल बना दिया था। लोग यहां धरना प्रदर्शन करते थे। गाजीपुर के रहने वाले रामवृक्ष यादव ने दो दिन के लिए यहां प्रवास की अनुमति 2014 में मांगी थी। उसके साथ गिनती के लोग थी।
लेकिन जैसे ही वह ठहरा, भीड़ आ गई। इसके बाद उन्होंने कब्जा कर लिया। यह बाग मथुरा के वीवीआईपी रोड पर है। यहां जमीन की कीमत 25 हजार से 50 हजार वर्ग गज है। बाग की जमीन 280 एकड़ में है। इसी पर उसने कब्जा जमा लिया था।
कब्जाधारियों से डरते थे पुलिसवालों के परिवार
आगरा। जवाहर बाग पुलिस लाइन के बराबर में है। इसकी दीवार से पुलिसवालों के आवास सटे हैं। यहां रहने वाले उनके परिवार रामवृक्ष और उसके अनुयायियों से डरते थे। कब्जाधारी उनके बच्चों से गालियां देकर बोलते थे। पुलिस वालों को कोसते थे। उसने पुलिसवालों और उनके परिवारों की बाग में एंट्री बंद कर दी थी। कोई अंदर जाता, तो उसके साथ मारपीट करता। बाग खाली हो जाने से सबसे ज्यादा सुकून इन लोगों को ही मिला है।
जवाहर बाग के कब्जाधारियों का प्रमुख रामवृक्ष कहां है कोई नहीं जानता
जवाहर बाग के कब्जाधारियों का प्रमुख नेता रामवृक्ष यादव आपरेशन के दौरान कहां गया पता नहीं चल पा रहा है। आपरेशन के शुरूआत में पुलिस पर पेड़ों से गोली चलाने वाला रामवृक्ष यादव खुद के बचाव में भागने लगा था।
इसके बाद उसका पता नहीं चल सका। डीजीपी जावीद अहमद ने रामवृक्ष के सवाल पर कहा कि रामवृक्ष का पता नहीं चल सका है। वह अगर फरार है तो उसे पकड़ लिया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर पोस्टमार्टम पर पड़े जवाहरबाग के उपद्रवियों के शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी। उनको 72 घंटे तक के लिए फ्रीजर में रख दिया है।