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राजनीति की पिच पर खूब खेले मास्टर ब्लास्टर पीएम मोदी

Thu, 08 Feb 2018 08:13 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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नरेंद्र मोदी - फोटो : PTI
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राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा पर जवाब देते हुए मास्टर ब्लास्टर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जमकर खेले। कांग्रेस मुक्त भारत पर भी खेले और राजनीति की पिच पर भी दमदार स्ट्रोक्स लगाए। प्रधानमंत्री पूरी रौ में थे। विपक्ष की यॉर्कर, बाऊंसर से बचते हुए उन्होंने खूब छक्के जड़े। विपक्ष को अपने गांव की क्रिकेट का हवाला देते हुए नसीहत भी दी कि गांव के बच्चे की तरह वह खेल नहीं चलेगा कि अपने बल्लेबाजी कर लिए और फिर मैदान छोड़कर चल दिए। हालत यह रही प्रधानमंत्री मोदी के जवाब देने के बाद राज्यसभा में विपक्ष के पास एक ढंग का स्पष्टीकरण भी नहीं था। 
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प्रधानमंत्री के जवाब देने के बाद पूर्व रक्षा मंत्री और कांग्रेस के नेता एके एंटनी खड़े हुए। उन्होंने सैन्य बलों के लिए एक रैंक एक पेंशन पर स्पष्टीकरण चाहा, लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उस पर भी सवाल उठा दिया और विपक्ष ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यहां तक कि विपक्ष ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे समेत तमाम सवालों के जवाब न मिलने का मुद्दा भी नहीं उठाया। इसके बरअक्स अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने लक्षणा, व्यंजना, तंज के साथ पूर्व के सरकारों की नाकामी को बताते हुए अपनी सरकार की सफलता गिनाई। उन्होंने सदन को बताया कि उनकी सरकार व्यापक दृष्टिकोण के साथ सही उद्देश्य को लेकर देश को विकास के रास्ते पर ले जाने के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।

याद आए कवि दुष्यंत 

देश में भय, आतंक का माहौल पर प्रधानमंत्री ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नरेश अग्रवाल की चर्चा का जिक्र करते हुए अपने अंदाज में कहा भय का माहौल...जेल...। हम तो भुक्त भोगी हैं। 15 साल में क्या कुछ नहीं झेला है। हमको मालूम है....लेकिन कानून तो अपना काम करेगा ही। इसके साथ प्रधानमंत्री ने प्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार की पंक्तियां सुनाई। उन्होंने कहा - उनकी अपील है कि उन्हें हम मदद करें, चाकू कि पसलियों से गुजारिश तो देखिए। 
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दुष्यंत कुमार की इस पंक्ति के साथ प्रधानमंत्री वह सबकुछ कह गए, जिसका एहसास विपक्ष को बिना कुछ कहे ही हो गया।

स्वच्छता पर खर्च को लेकर भी नहीं बख्शा 

प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को याद दिलाया कि कैसे इस देश में एक पार्टी के परिवार के लोगों के जन्मदिन पर देश के गरीबों लोगों से आए करोड़ों रुपये विज्ञापन पर खर्च हो जाते थे। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद के सवाल का उत्तर देते हुए कहा कि स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाने के लिए लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाना जरूरी है। इसलिए इस पर विज्ञापन में खर्च करके लोगों को शिक्षित किया जा रहा है। देश के लोगों के व्यहार में परिवर्तन लाकर स्वच्छता के प्रति स्वभाव को पैदा किया जा रहा है।

जरा इतिहास पलटकर देख लीजिए 

जरा इतिहास पलटकर देख लीजिए 

चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्ष को पुरानी सरकारों की परंपरा याद दिलाई। उन्होंने कहा कि एक समय था, उद्घाटन करके नेता माला पहनकर चले जाते थे। परियोजना की कागज पर घोषणा हो जाती थी और वह जमीन पर एक लाइन भी आगे नहीं बढ़ती थी। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी योजनाओं के बारे में जानकारी ली तो ऐसी योजनाएं सामने आई जो 30-40 साल से लंबित पड़ी थी। यदि यह उसी समय पूरी हो जाती तो कम खर्च में देश का भला हो जाता। उनकी सरकार ने इन्हें पूरा कराने का निर्णय किया और इस तरह की करीब नौ लाख करोड़ रुपये की परियोजना को पूरा किया जा रहा है।
 
नेता प्रतिपक्ष पर भी चुटकी 

मोदी ने चर्चा की शुरुआत ही नेता प्रतिपक्ष के साथ हंसी ठिठोली से शुरू किया। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने अभिभाषण पर धन्यवाद का प्रस्ताव किया, विनय सहस्रबुद्धे ने अनुमोदन किया। नेता प्रतिपक्ष बोले। उन्होंने गुलाम नबी आजाद को सदन में बैठककर सुना। बाकी लोगों को कमरे में सुना। इसलिए आजाद का बॉडी लैंग्वेज देखा। वह एक परिवार को बचाने की कोशिश कर रहे थे। जब वह ऐसा कर रहे थे तो उनकी मासूमियत अच्छी लग रही थी। 

सदन में विपक्ष के उप-नेता आनंद शर्मा का भी जिक्र किया। कहा आनंद शर्मा का अपना एक बोलने का स्टाइल है। आप बर्फ का भी छूरा बनाकर भोंक सकते हैं। प्रधानमंत्री ने आनंद शर्मा के तीखे सवालों, आक्रामक अंदाज में अपनी बात रखने पर तंज कसा था।

रेणुका चौधरी को भी प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी हंसी पर व्यंग के जरिए आड़े हाथों लिया। प्रधानमंत्री आधारकार्ड का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कहती है, इसे उसने शुरू किया था। इसी के साथ वह सात जुलाई 1998 में राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल और तत्कलीन गृहमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के मल्टी परपज कार्ड (आधार जैसा) का जवाब बताने लगे। इस पर रेणुका ने जोर से हंसना शुरू कर दिया। सभापति ने भी रेणुका को टोका लेकिन प्रधानमंत्री ने हल्के अंदाज में व्यंग कस दिया। उन्होंने कहा कि रामायण के बाद आज ऐसी हंसी सुनने का सौभाग्य मिला।
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हमें भी गांधी वाला भारत चाहिए 

हमें भी गांधी वाला भारत चाहिए 

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं के न्यू इंडिया पर हमले का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष कह रहा है कि उसे न्यू इंडिया नहीं चाहिए। पुराना भारत लौटा दो। उसे गांधी जी वाला पुराना भारत चाहिए। मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की याद दिलाते हुए कहा कि उन्हें भी गांधी जी वाला भारत चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को आजादी मिलने के बाद गांधी जी ने कांग्रेस को भंग करने करने के लिए कहा था। वह कांग्रेस मुक्त भारत चाहते थे और हम भी वही भारत चाहते हैं। 

मोदी ने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या उसे जीप घोटाले, पनडुब्बी घोटाले, आपातकाल के समय राजनीतिक दलों के नेताओं को जेल में ठूंस देने वाला, पत्रकारिता पर इमरजेंसी थोपने वाला, या जब एक पेड़ गिरने के बाद हजारों सिक्खों का कत्लेआम हो जाने वाला भारत चाहिए? इसी के साथ उन्होंने विपक्ष को काफी नसीहतें दे दी। 

राजनीति की पिच पर जमकर खेले 

प्रधानमंत्री ने अपनी तमाम योजनाएं गिनाई। जनधन अकाऊंट के 31 करोड़ खातों को अपने समय में ही खोला गया बताया। वह 10 करोड़ परिवारों के लिए बजट में प्रस्तावित स्वास्थ्य बीमा योजना पर भी आए। चर्चा, सुझाव, राजनीतिक दलों द्वारा टास्क फोर्स गठित करने और जनता से सुझाव देने का जिक्र किया। उन्होंने विपक्ष से कहा कि वह जमकर आलोचना करे। यह उसका कर्तव्य और हक है। प्रधानमंत्री मोदी की भी आलोचना करे, लेकिन तथ्यों को स्वीकार करके दलगत भावना से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण में भी सहयोग के लिए आगे आए। वह ओबीसी (अन्य पिछड़ी जातियों) की राजनीति पर भी जमकर खेले। वह पूरी तरह से अगले लोकसभा चुनाव की पिच तैयार करने की भूमिका में भी नजर आए। अंत में एक देश, एक चुनाव की थीम पर लौट आए। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण में इसके जिक्र का उल्लेख करते हुए राष्ट्रहित में और भारी-भरकम चुनाव पर होने वाले खर्च को कम करने, बार-बार चुनाव की स्थिति से बचने के लिए इस पर गंभीरता के साथ विपक्ष से चर्चा की अपील की । सहयोग मांगा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को पारित करने का अनुरोध किया।
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