महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री व विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस के ड्रीम प्रोजेक्ट जलयुक्त शिवार योजना एक बार फिर चर्चा में है। इस योजना में भ्रष्टाचार के जांच के लिए गठित विजय कुमार समिति ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। समिति ने इस योजना के तहत हुए 1000 कामों की जांच की सिफारिश की है। इससे ठाकरे सरकार को फडणवीस को घेरने का मौका मिल गया है।
फडणवीस ने तय किया था कि साल 2019 तक महाराष्ट्र को जलसंकट से मुक्त कर दिया जाएगा। लेकिन इस महत्वाकांक्षी योजना में बड़े पैमाने पर शिकायतें मिली। जलयुक्त शिवार योजना के काम में नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) ने भी अपनी रिपोर्ट में भ्रष्टाचार की आशंका जताई थी।
कैग ने कहा है कि खर्च की तूलना में इस योजना का काम जमीन पर नहीं दिखाई दे रहा है। अब कैग की रिपोर्ट के आधार पर ठाकरे सरकार ने पूर्व प्रशासनिक अधिकारी विजय कुमार की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने 70 पन्नों की अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है जिसमें 600 से अधिकांश कामों में भ्रष्टाचार की शिकायतों का जिक्रहै।
अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक करीब 900 कामों की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के जरिए और 100 कामों की जांच विभागीय स्तर पर की जा सकती है।
अनियमितता का आरोप बदनाम करने की साजिश: शेलार
भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री आशीष शेलार ने कहा, जलयुक्तशिवार योजना में अनियमितता का आरोप केवल देवेंद्र फडणवीस को बदनाम करने की साजिश है। राजनीतिक द्वेष के लिए इस योजना को बदनाम किया जा रहा है।
जबकि इस योजना का काम लघु सिंचाई विभाग और जिलाधिकारी के माध्यम से शुरू हुआ था। यह ग्रामीणों के सहयोग से चलाया गया कार्यक्रम था। इससे किसी व्यक्ति को बदनाम करने का प्रयास सफल नहीं हो सकता। जो आरोप सामने आ रहा है उसके तहत 90 फीसदी कामों की जांच का आदेश खुद फडणवीस ने ही दिया था।
इस योजना के फलस्वरूप मराठावाड़ा में जलस्तर बढ़ा। जिस समय यह योजना शुरू की गई थी उस समय विजय कुमार भी राज्य कृषि विभाग में सचिव थे। इसलिए इस योजना में उनकी भी भूमिका थी।