प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रोड शो किया। कांग्रेस कार्यकर्ता इसे यूपी चुनाव के शंखनाद के तौर पर देख रहे हैं। छह घंटे के इस मेगा शो में कार्यकर्ताओं का उत्साह देखकर साफतौर पर दिख रहा है कि इसने पार्टी को संजीवनी दे दी है।
साल 2014 के लोकसभा में वाराणसी संसदीय सीट से नरेंद्र मोदी के दावेदारी के साथ ही यह सीट बीजेपी की यूएसपी बन गई थी। वहां के विकास के लिए जापान के क्योटो से समझौता हो या नरेंद्र मोदी की स्वच्छता अभियान की शुरुआत, बनारस को खास महत्व मिलता रहा है। स्थिति यहां तक हो गई है कि इसे 'मोदी की काशी' तक कहा जाने लगा है। ऐसी स्थिति में सोनिया का वहां से चुनावी शंखनाद उन्हें सीधी चुनौती दे रहा है।
साल 2004 के बाद पहली बार कांग्रेस के पक्ष में वाराणसी में इतनी भीड़ इकट्ठा हुई। इसके पहले 2004 में हुए राहुल गांधी के रोड शो ने वाराणसी में माहौल ही बदल दिया था। उस दौरान भाजपा को कांग्रेस के डॉ. राजेश मिश्रा के हाथों करारी शिकस्त मिली थी। तब राहुल गांधी का वाराणसी में लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया था। कांग्रेस ने वाराणसी सीट पर तीन बार के सांसद रहे शंकर प्रसाद जायसवाल को हराया था।
बनारस की यह मान्यता है कि जो व्यक्ति पहली बार यहां आता है बाब काल भैरव का दर्शन जरूर करता है। नरेंद्र मोदी अभी तक वहां दर्शन करने नहीं गए हैं, जबकि उनके हर दौरे में यह कयास लगाए कि वह दर्शन करने जाएंगे। वहीं, सोनिया गांधी के दर्शन करने के कदम ने बानारसियों के दिल में उनकी जगह और मजबूत कर दी है। ऐसे में शीला दीक्षित की उम्मीदवारी और बनारस से चुनाव की शुरुआत से कांग्रेस यूपी के 11 फीसदी मतदाताओं को सीधा टार्गेट कर रही है।
मोदी सरकार ने अपने कैबिनेट विस्तार में बनारस से ताल्लुक रखने वाले मनोज सिन्हा, महेंद्र नाथ पांडेय और अनुप्रिया पटेल को तवज्जो देकर हर वर्ग का साधने का प्रयास किया। वहीं, सोनिया ने वाराणसी में रैली के दौरान आंबेडकर, महात्मा गांधी, सरदार पटेल, लाल बहादुर शास्त्री, कबीर और कमलापति त्रिपाठी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।