फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोदी के 'गढ़' में सोनिया, क्या भारी भीड़ बदलेगी प्रदेश की फिजा?

Tue, 02 Aug 2016 07:07 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
सोनिया गांधी
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रोड शो किया। कांग्रेस कार्यकर्ता इसे यूपी चुनाव के शंखनाद के तौर पर देख रहे हैं। छह घंटे के इस मेगा शो में कार्यकर्ताओं का उत्साह देखकर साफतौर पर दिख रहा है कि इसने पार्टी को संजीवनी दे दी है।
विज्ञापन


साल 2014 के लोकसभा में वाराणसी संसदीय सीट से नरेंद्र मोदी के दावेदारी के साथ ही यह सीट बीजेपी की यूएसपी बन गई थी। वहां के विकास के लिए जापान के क्योटो से समझौता हो या नरेंद्र मोदी की स्वच्छता अभियान की शुरुआत, बनारस को खास महत्व मिलता रहा है। स्थिति यहां तक हो गई है कि इसे 'मोदी की काशी' तक कहा जाने लगा है। ऐसी स्थिति में सोनिया का वहां से चुनावी शंखनाद उन्हें सीधी चुनौती दे रहा है। 

साल 2004 के बाद पहली बार कांग्रेस के पक्ष में वाराणसी में इतनी भीड़ इकट्ठा हुई। इसके पहले 2004 में हुए राहुल गांधी के रोड शो ने वाराणसी में माहौल ही बदल दिया था। उस दौरान भाजपा को कांग्रेस के डॉ. राजेश मिश्रा के हाथों करारी शिकस्त मिली थी। तब राहुल गांधी का वाराणसी में लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया था। कांग्रेस ने वाराणसी सीट पर तीन बार के सांसद रहे शंकर प्रसाद जायसवाल को हराया था। 
विज्ञापन


बनारस की यह मान्यता है कि जो व्यक्ति पहली बार यहां आता है बाब काल भैरव का दर्शन जरूर करता है। नरेंद्र मोदी अभी तक वहां दर्शन करने नहीं गए हैं, जबकि उनके हर दौरे में यह कयास लगाए कि वह दर्शन करने जाएंगे। वहीं, सोनिया गांधी के दर्शन करने के कदम ने बानारसियों के दिल में उनकी जगह और मजबूत कर दी है। ऐसे में शीला दीक्षित की उम्मीदवारी और बनारस से चुनाव की शुरुआत से कांग्रेस यूपी के 11 फीसदी मतदाताओं को सीधा टार्गेट कर रही है। 

मोदी सरकार ने अपने कैबिनेट विस्तार में बनारस से ताल्लुक रखने वाले मनोज सिन्हा, महेंद्र नाथ पांडेय और अनुप्रिया पटेल को तवज्जो देकर हर वर्ग का साधने का प्रयास किया। वहीं, सोनिया ने वाराणसी में रैली के दौरान आंबेडकर, महात्मा गांधी, सरदार पटेल, लाल बहादुर शास्त्री, कबीर और कमलापति त्रिपाठी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। 

सोनिया गांधी
इस कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेस जनता को सीधा संदेश देना चाहती थी कि 27 साल से यूपी बेहाल है और शीला दीक्षित ने जिस तरह दिल्ली को संवारा है उसी तरह मौका मिलने पर यूपी को पहचान देंगी।

सोनिया के रोड शो की खास बात यह भी रही कि इसमें यूपी कांग्रेस से जुड़े सभी नेताओं की मौजूदगी दिखी। प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर, प्रभारी गुलाम नबी आजाद, सलमान खुर्शीद, श्रीप्रकाश जायसवाल, प्रमोद तिवारी, रीता बहुगुणा जोशी, जफर अली, संजय सिंह, राणा गोस्वामी, राजेश मिश्रा, अजय राय, राजेश पति त्रिपाठी सहित छोटे बडे़ सभी नेताओं ने पूरे दमखम के साथ इसमें भाग लिया। इससे पार्टी दिखाना चाहती थी कि उसमें कोई गुटबाजी नहीं है।
विज्ञापन

राज बब्बर
चुनावी जानकार मानते हैं कि सोनिया की इस रैली का प्लान चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बनाया था। वह चुनाव से पहले कांग्रेस के पक्ष में एक माहौल बनाना चाहते हैं। वहीं, सोनिया की इस रैली से वह यह भी दिखाना चाहते हैं कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है और सभी नेता शीला दीक्षित के नेतृत्व में चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।

वाराणसी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का केंद्र बिंदु माना जाता है। इसी को ध्यान में रखकर नरेंद्र मोदी ने वहां से चुनाव लड़ा था। कांग्रेस ने इसी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए सोनिया का रोड शो कराया। इससे वाराणसी के आसपास के जिलों की सीटों पर प्रभाव पड़ेगा। वहीं, वाराणसी की 8 में तीनों शहरी विधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है, जबकि एक ग्रामीण सीट पर कांग्रेस के अजय राय विधायक हैं। ऐसे में यह रोड शो महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें