जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को पाकिस्तानी सेना ने रावलपिंडी के बेस अस्पताल से बहावलपुर के गोठ गन्नी में स्थानांतरित किया गया था। ऐसा भारतीय वायुसेना द्वारा बालाकोट के आतंकी कैंपों पर की गई एयर स्ट्राइक की वजह से किया गया था। इस समय मसूद गुजरावालां के शेखुपुरा के इस्लामी मदरसे में रह रहा है। यह स्थान इस्लामाबाद से 300 किलोमीटर दूर है।
उच्च खुफिया सूत्रों का कहना है कि अजहर जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (यूएनएससी) ने बुधवार को वैश्विक आंतकी घोषित कर दिया है, वह बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहा था। अजहर को सुरक्षा के लिए 10 पाकिस्तान स्पेशल सर्विस कमांडोज दिए गए थे। बालाकोट स्ट्राइक को पुलवामा हमले के बाद अंजाम दिया गया था। 14 फरवरी को जैश के आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला कर दिया था। जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे।
दिलचस्प बात यह है कि अजहर पिछले हफ्ते आठमुकाम आया था और यहीं रहने लगा। यह आतंकी कैंपों का डेरा है। यह स्थान नियंत्रण रेखा के पास नीलम वैली में है। सूत्रों का कहना है कि केवल चार दिन पहले पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के जूरा शहर में वह पाकिस्तानी सेना के साथ रुका था। यह इस्लामाबाद से 100 किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित है।
सूत्रों का कहना है कि भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान ने अजहर की आठमुकाम यात्रा को महत्वपूर्ण बताया था। अजहर को गंभीर बीमारी है और उसे लगातार चिकित्सा देखभाल की जरुरत है, इसके बावजूद सेना के साथ उसका मुलाकात करना महत्वपूर्ण था। उसका छोटा भाई रउफ अजगर इस समय आतंकी कैंपों को संचालित कर रहा है। ऐसे में अपने भाई को भेजने की बजाए वह खुद सेना से मुलाकात करने के लिए गया। सूत्र ने बताया कि अजहर ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसे चीन द्वारा यूएनएससी में उठाए जाने वाले कदम के बारे में पूर्वानुमान हो गया था।