पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दम पर भारत समेत दुनिया भर को धमकाने वाला सरगना मौलाना मसूद अजहर दरअसल बहुत ही डरपोक किस्म का आदमी है। सिक्किम पुलिस के पूर्व महानिदेशक अविनाश मोहनाने का कहना है कि सेना के जवान के एक थप्पड़ में ही उसकी अकड़ ढीली पड़ गई थी और वह सारे राज उगलने लगा था। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में फरवरी, 1994 में उसकी गिरफ्तारी की गई थी। उस दौरान मोहनाने ने उससे पूछताछ की थी। अजहर पुर्तगाली पासपोर्ट पर बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसकर कश्मीर पहुंचा।
अविनाश ने बताया कि हिरासत में खुफिया एजेंसियों को उससे पूछताछ करने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी थी। सेना के जवान के एक थप्पड़ पर ही वह बुरी तरह से हिल गया था और बोलना शुरू कर दिया था। उसने पाकिस्तान में आतंकवादियों की भर्ती प्रक्रिया और आतंकी गुटों की गतिविधियों की जानकारी दी थी। 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी मोहनाने ने इंटेलीजेंस ब्यूरो में दो दशक के अपने कार्यकाल में अजहर से कई बार पूछताछ की थी। उन्होंने उस वक्त आईबी में कश्मीर डेस्क का नेतृत्व किया था।
ज्यादा बल प्रयोग नहीं करना पड़ा था
उन्होंने बताया कि कई बार कोट बलवाल जेल में उससे कई घंटे तक पूछताछ की। हमें उस पर ज्यादा बल प्रयोग नहीं करना पड़ा क्योंकि वह खुद ही सारी सूचनाएं बताता चला गया। उसी ने अफगानी आतंकियों के घाटी में भेजे जाने की जानकारी दी थी। साथ ही हरकत उल मुजाहिदीन (एचयूएम) और हरकत उल जेहाद ए इस्लामी (हुजी) के हरकत उल अंसार में विलय की भी जानकारी दी थी। वह हरकत उल अंसार का सरगना था।
सहारनपुर में की थी बैठक
मोहनाने ने बताया कि बांग्लादेश से 1994 में भारत पहुंचने के बाद अजहर कश्मीर जाने से पहले सहारनपुर गया था। यहां उसने साझा नीति बनाने के लिए एचयूएम और हूजी के अलग-अलग धड़ों के साथ बैठक की थी ताकि दोनों घाटी में एक साथ आ सकें।
पत्रकार बनकर गया था कई देशों में
अविनाश ने बताया कि कराची से प्रकाशित समाचार पत्र ‘सदा ए मुजाहिद’ में पत्रकार के तौर पर अजहर ने पाक के पत्रकारों के साथ 1993 में कुछ देशों की यात्रा की थी, जहां उसने ‘कश्मीर हित’ के लिए समर्थन मांगा था।
हमेशा छूट जाने का करता था दावा
मोहनाने ने बताया कि अजहर हमेशा दावा करता था कि पुलिस उसे ज्यादा दिन तक हिरासत में नहीं रख पाएगी क्योंकि वह पाकिस्तान और आईएसआई के लिए महत्वपूर्ण है। फरवरी 1994 में गिरफ्तारी के 10 महीने बाद दिल्ली से कुछ विदेशी नागरिकों का अपहरण हो गया और अपहर्ताओं ने उसे रिहा करने की मांग की लेकिन उमर शेख की गिरफ्तारी के कारण यह साजिश नाकाम हो गई। हालांकि 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 के यात्रियों के अपहरण के बदले उसे रिहा कर दिया गया।