मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत रविवार को जन्म-जन्म तक साथ रहने की कसम और एक-दूसरे को जयमाला पहनाने के बाद एक नवविवाहित जोड़े ने मंगलवार को शादी से इंकार कर दिया। जोड़ा नगर निगम में पहुंचा और जबरन शादी कराने की बात कहकर खुद को अलग करने की बात कहने लगा, लेकिन जब उसे बताया गया कि अब न्यायालय से ही उनका संबंध विच्छेद हो सकता है तब वह शांत हो गया। हालांकि उसने शादी की मध्यस्थता कराने वाले एक व्यक्ति पर पैसा लेकर धोखाधड़ी का आरोप लगाया और कहा कि उक्त व्यक्ति ने उसकी जिंदगी बरबाद कर दी।
गरीब कन्याओं की शादी कराने के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना संचालित की जा रही हैं। इसके अंतर्गत वर-वधू पक्ष को दस हजार रुपये, दो साड़ी, एक सफारी सूट, एक मोबाइल, एक जोड़ी चांदी की बिछिया, एक जोड़ी चांदी की पायल, कुकर, स्टील की टंकी, परात, भगोना, बर्तनों का सेट आदि उपहार के रूप में दिया जाता है। कन्या को 20 हजार रुपये का चेक भी दिया जाता है। रविवार को नगर निगम की ओर से आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में नौ जोड़ों की पूरे रीति-रिवाज के साथ शादी कराई गई थी। शादी समारोह में महापौर रामतीर्थ सिंघल और विधायक रवि शर्मा भी शामिल हुए थे।
मंगलवार को इनमें से एक जोड़ा नई बस्ती निवासी कृष्ण गोपाल शाक्य और अंदर सैंयर गेट निवासी श्रीमती कमलेश शाक्य नगर निगम पहुंचे। संयुक्त नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता से शिकायत करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी बिना जानकारी के शादी करा दी गई। वह शादी नहीं करना चाहते, उन्हें अलग किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी-समारोह की मध्यस्थता करने वाले एक व्यक्ति ने उनको झांसा देकर पांच हजार रुपये भी ले लिए। लड़के के पिता अशोक कुमार शाक्य ने बताया कि वह मजदूरी करता है। बेटे ने कुछ दिनों पहले चाऊमीन और डोसा की दुकान खोली है। लड़की के माता- पिता नहीं हैं। छह महीने पहले उनके बेटे की इसी लड़की के साथ सगाई हुई थी, लेकिन उनकी शादी धोखे में रखकर करा दी गई है और पांच हजार रुपये भी एक व्यक्ति ने ले लिए हैं।
इस संबंध में संयुक्त नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता ने बताया कि शिकायत आई है। शादी के दस्तावेज विभाग के पास हैं। जबरन नहीं बल्कि शादी मर्जी से कराई गई है। शादी के कागजात पर दोनों के हस्ताक्षर हैं। यदि जबरन शादी कराई जा रही थी तो पहले कहना चाहिए था, अब कुछ नहीं हो सकता।