1904 से बन रही राधास्वामी मत के संस्थापक परम पुरुष पूरनधनी स्वामी जी महाराज की पवित्र समाधिि स्वामीबाग की सफाई और संरक्षण का काम लेजर तकनीक से किया जाएगा। संगमरमर और महंगे पत्थरों से तामीर हो रहे स्वामी बाग समाधिि पर इटली, चीन के लेजर तकनीक एक्सपर्ट डेमो के तौर पर छह अगस्त से क्लीनिंग का काम शुरू करेंगे।
संगमरमर पर लेजर तकनीक के प्रभाव को मापने के लिए एएसआई अधिकारी भी मौजूद होंगे। स्वामी बाग पर अगर लेजर क्लीनिंग कामयाब रही तो ताजमहल, आगरा किला सहित वर्ल्ड हेरिटेज पर भी यह तकनीक प्रयोग किए जाने का विकल्प खुल जाएगा।
देश में पहली बार लेजर तकनीक का प्रयोग इसी संगमरमरी इमारत पर होगा। अब तक भारत में मडपैक थेरेपी से ही संगमरमरी इमारतों की साफ सफाई होती रही है। राधास्वामी सत्संग स्वामीबाग की सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव काउंसिल सचिव एसएस भट्टाचार्य, ट्रस्ट सचिव गुरू चरण दास ने बताया कि लेजर क्लीनिंग का डेमो इटली की कंपनी एलएन छह अगस्त से शुरू करेगी।
पुणे की कार्व यूनिवर्सिटी के लेजर डिवीजन के छात्र भी इसमें हिस्सा लेंगे। मौसम, पर्यावरण से प्रभावित समाधि के कार्विंग और कीमती पत्थरों पर लेजर एक्सपर्ट डा. जानिनी की टीम इस तकनीक को आजमाएगी।
नगर पंचायत चेयरमैन संजय कपूर ने बताया कि केमिकल क्लीनिंग के उलट इसके साइड इफेक्ट नहीं होंगे। ‘112 साल में पवित्र समाधि के कुछ हिस्सों की क्लीनिंग की जरूरत है। छह से 10 अगस्त तक विदेशी विशेषज्ञ लेजर तकनीक से दीवारें, कार्विंग को साफ करके दिखाएंगे।
रिजल्ट अच्छे होंगे तो दो साल बाद होने वाले द्विशताब्दी समारोह से पहले समाधि के संरक्षण, साफ सफाई का काम लेजर से पूरा कराया जाएगा’ 2018 में पूर्ण हो जाएगा समाधि का काम दुनिया भर में करोड़ों सत्संगियों वाले राधास्वामी मत के संस्थापक स्वामीजी महाराज की पवित्र समाधि का काम 1904 में महाराज साहब ने शुरू कराया था।
2018 में स्वामीजी महाराज का 200 वां जन्म महोत्सव मनाया जाएगा। स्वामीबाग की सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव काउंसिल का लक्ष्य उससे पहले समाधि का काम पूरा करने का है। 2018 में 31 अगस्त से छह सितंबर के बीच दुनिया भर के लाखों सत्संगी समाधि पर मत्था टेकने और सत्संग में आएंगे।
सात दिन तक पूरे 24 घंटे सत्संग चलेगा। पन्नी गली से 200 साला जश्न की शुरूआत होगी। लेजर से भारत में पहली बार सफाई, संरक्षण होगा, लेकिन विदेश में इटली का प्रसिद्व होप स्टेच्यू, नेपाल का रॉयल पैलेस आफ पाटन, क्रोशिया का डायोक्लेशियन पैलेस, जेरूशलम इजरायल में एसएस सेपल्चर, यूनान के एक्रोपोलिस मंदिर, पार्थेनन के मंदिर में प्रयोग हो चुका है।
केमिकल क्लीनिंग या मडपैक की जगह लेजर तकनीक ज्यादा कारगर रही है।