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Maharashtra: एक से 10वीं तक मराठी न पढ़ाने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई, वसूला जाएगा जुर्माना; जानें निर्देश

Sat, 18 Apr 2026 12:03 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

महाराष्ट्र सरकार ने कक्षा एक से 10वीं तक मराठी भाषा अनिवार्य है। नियम न मानने वाले स्कूलों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगेगा और उनकी मान्यता भी रद्द हो सकती है। वहीं, टैक्सी ड्राइवरों के लिए भी मराठी अनिवार्य करने पर विपक्ष ने इसे गरीबों को परेशान करने वाला कदम बताया है।
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों में कक्षा एक से 10वीं तक मराठी भाषा को अनिवार्य की गई है। जो स्कूल इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में एक विस्तृत सरकारी आदेश (जीआर) जारी किया है। इस प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया है कि शैक्षणिक वर्ष 2020-21 से ही राज्य के सभी स्कूलों में मराठी एक अनिवार्य विषय है। यह नियम 'महाराष्ट्र अनिवार्य शिक्षण और मराठी भाषा अधिगम अधिनियम, 2020' के तहत लागू किया गया था।
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सरकार हुई सख्त
नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के लिए सरकार ने एक सख्त प्रक्रिया तय की है। सबसे पहले दोषी स्कूल को नोटिस दिया जाएगा। स्कूल प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देना होगा। अगर स्कूल का जवाब संतोषजनक नहीं होता है, तो उस पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही स्कूल को अगले शैक्षणिक वर्ष से मराठी विषय अनिवार्य रूप से शुरू करने का आदेश दिया जाएगा।

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नियमों का उल्लंघन करने होगी कार्रवाई
इसके अलावा स्कूलों को इस निर्णय के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिनों का समय मिलेगा। अगर अपील के बाद भी स्कूल आदेश को नहीं मानता है, तो उसकी मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद स्कूल शिक्षा आयुक्त इस मामले में सुनवाई करेंगे और तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला लेंगे। विभाग का कहना है कि इस कदम से राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा की पढ़ाई को प्रभावी  शिक्षण को सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
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रिक्शा चालको के लिए नए नियम पर राजनीति तेज
दूसरी ओर, सरकार ने हाल ही में टैक्सी और रिक्शा ड्राइवरों के लिए भी मराठी भाषा को अनिवार्य किया है। इस फैसले पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने सरकार के इन फैसलों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ये नियम गरीब लोगों को परेशान करने के लिए लाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह रिक्शा और टैक्सी वालों से पैसा वसूलने का एक जरिया है।

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