कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि विपक्ष ने संविधान की रक्षा करते हुए सरकार की परिसीमन से जुड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमने भारत के संविधान की रक्षा का जश्न मनाया है। उन्होंने जो परिसीमन लाने की साजिश रची थी, उसे हमने हरा दिया। विपक्ष का कहना है कि सरकार को पुराने महिला आरक्षण विधेयक को वापस लाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन सरकार जिस तरीके से इसे लेकर आई है, उसका समर्थन नहीं किया जा सकता।
प्रियंका गांधी ने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि केंद्र पुराना महिला आरक्षण बिल लाएं, जो सभी पार्टियों द्वारा पास किया गया था। सोमवार को संसद बुलाइए, बिल लाइए और देखिए कौन महिला विरोधी है। हम सभी उसका समर्थन करेंगे।
यह बयान ऐसे समय आया है जब शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया गया संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा। कुल 528 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा लिया, जिसमें 298 ने पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की कि विधेयक पारित नहीं हुआ। परिणाम सामने आने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार अब इससे जुड़े बाकी दो इंटरलिंक्ड विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाएगी।
विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। भाजपा का आरोप है कि विपक्षी दलों ने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले इस ऐतिहासिक सुधार को रोक दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस, टीएमसी और अन्य दलों पर विधेयक को पास न होने देने का आरोप लगाते हुए राजनीतिक परिणामों की चेतावनी दी।
हालांकि, विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह महिला आरक्षण के सिद्धांत का समर्थन करता है, लेकिन इसे परिसीमन और जनगणना प्रक्रिया से जोड़ने का विरोध करता है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस विधेयक को भारत की चुनावी संरचना में बदलाव की कोशिश बताया, जबकि कांग्रेस के कई नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का कदम बताया।