शरद पवार ने मराठी में दिए अपने इंटरव्यू में राफेल डील के मुद्दे पर जहाज की कीमत बताने, कीमत तीन गुना तक बढ़ जाने का कारण बताने, जेपीसी की जांच और सरकार द्वारा विपक्ष के आरोपों का जवाब देने का मुद्दा उठाया था। लेकिन इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी की नियत पर लोगों को कोई संदेह नहीं है। वहीं राफेल विमान को लेकर तकनीकी जानकारी किसी से साझा करने की जरूरत मैं (पवार) नहीं समझता।
चतुराई पड़ रही है भारी
पवार साहब राजनीति के मंझे खिलाड़ी हैं। वह दोस्त और दुश्मन दोनों से समान रिश्ता रखने वाले राजीनतिज्ञों में गिने जाते हैं। जीत पक्की हो तो पवार साहस और कौशल दोनों दिखाते नजर आते हैं और जब इसमें शंका हो तो धीरे से रास्ता बदल लेते हैं। ताजा उदाहरण राज्यसभा में उपसभापति पद के चुनाव का है। जनता दल (बीजू) का समर्थन मिलते देख पवार ने एनसीपी उम्मीदवार का कदम वापस ले लिया और कांग्रेस पार्टी को आखिरी क्षण में बी.के. हरिप्रसाद को मैदान में उतारना पड़ा।
2014 में शरद पवार ने देवेन्द्र फडनवीस सरकार को समर्थन देने की घोषणा करने में जरा भी देर नहीं लगाई थी। इतना ही नहीं गुजरात विधानसभा चुनाव में भी शरद पवार ने दांव खेला था। भाजपा का सहयोग करने के लिए ही एनसीपी ने कांग्रेस से अलग अपने प्रत्याशी खड़े किए। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी भी मानते हैं कि यदि एनसीपी ने गुजरात का चुनाव साथ लड़ा होता तो वहां कांग्रेस की सरकार सत्ता में होती।
महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष, एनसीपी के पूर्व महासचिव मुनफ हकीम को पार्टी छोडऩे का दु:ख है। मुनफ साफ कहते हैं कि उन्होंने यह फैसला सोच-समझकर लिया है। मुनफ ने तारिक अनवर के साथ एनसीपी को छोड़ा है। मुनफ का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, जब पार्टी ने भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी का साथ दिया है। हम पहले भी दोहरी नीति पर चले हैं। उनका कहना है कि पार्टी प्रमुख शरद पवार ऐसे मामलों में बिना चर्चा किए सीधा निर्णय ले लेते हैं।
दोहरी नीति लगा रही है विश्वसनीयता पर बट्टा
शरद पवार राहुल गांधी को राजनीति के गुर सिखाते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष शरद जी के पास जाते-रहते हैं, लेकिन इसी के साथ शरद पवार की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह से गहरी निभती है। साढे चार साल मोदी सरकार के शासन काल में शरद पवार ने विपक्ष की राजनीति करते हुए अपने अंदाज में हमला नहीं बोला। इसके अलावा शरद पवार एक ऐसे शख्स हैं, जिनकी हर राजनीतिक दल में गहरी पैठ है।
राजनीति के जानकारों का कहना है कि पवार साहब हमेशा चित और पट अपने पास रखते हैं। कांग्रेस पार्टी के एक बड़े नेता और मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं में गिने जाने वाले सूत्र के मुताबिक इसी राजनीति ने पवार को इस बार झटका दे दिया है। उनकी विश्वसनीयता उन्हीं की पार्टी एनसीपी में दांव पर लग गई है। वहीं रणदीप सुरजेवाला पवार की विश्वसनीयता पर कोई सवाल नहीं खड़े करते।
सुरजेवाला इस बारे में कहते हैं कि शरद पवार का बयान आने के बाद महाराष्ट्र के प्रभारी और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पवार से बात की थी। पवार ने अपनी सफाई में कहा है कि उनके बयान को गलत और झूठे तरीके से लिया जा रहा है। भाजपा इसके एक वाक्य का सहारा लेकर कांग्रेस और एनसीपी में दरार डालने का षडयंत्र रच रही है। शरद पवार कांग्रेस के साथ हैं।