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29 अगस्त से भूख हड़ताल पर अड़े जरांगे: अनशन से पहले सरकार ने बढ़ाया समिति का कार्यकाल, क्या अब टलेगा आंदोलन?

Wed, 26 Aug 2026 11:10 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, मुंबई।

सार

सरकार ने समिति को एक साल का और समय देकर मराठा-कुणबी रिकॉर्ड की तलाश पूरी करने की कोशिश तेज की है। लेकिन सवाल यह है कि 29 अगस्त से पहले क्या सरकार का यह कदम मनोज जरांगे को अनशन टालने के लिए मना पाएगा?
 
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जरांगे ने दी अनशन की धमकी - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे के प्रस्तावित अनिश्चितकालीन अनशन से पहले महाराष्ट्र सरकार ने एक अहम फैसला किया है। सरकार ने मराठा समुदाय के कुणबी रिकॉर्ड की जांच के लिए बनी समिति का कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया है। अब यह समिति 30 जून 2027 तक काम करेगी। सेवानिवृत्त बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश संदीप शिंदे की अध्यक्षता वाली समिति का कार्यकाल 30 जून 2026 को खत्म हो गया था। 25 अगस्त के सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, इसे एक साल का विस्तार दिया गया है।
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समिति का काम क्या है?
यह समिति मराठा समुदाय के लोगों के पुराने कुणबी रिकॉर्ड तलाशने का काम कर रही है। इसका उद्देश्य कुणबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तय करना है। ऐसे प्रमाणपत्र के आधार पर पात्र मराठा सरकारी नौकरियों और शिक्षा में अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण का लाभ ले सकेंगे। कुणबी समुदाय महाराष्ट्र में अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल है।

मामले से जुड़ी खास बातें
  • समिति को 30 जून 2027 तक काम पूरा करने का समय मिला है।
  • कुछ जिलों में मराठा-कुणबी वंशावली और पुराने रिकॉर्ड की खोज बाकी है।
  • सरकार को 58 लाख ऐतिहासिक कुणबी रिकॉर्ड मिलने की बात कही गई थी।
  • पात्र लोगों में से करीब आधे को कुणबी जाति प्रमाणपत्र मिलने की बात सामने आई थी।
  • मनोज जरांगे ने सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए 28 अगस्त तक का समय दिया है।
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क्यों बढ़ाया गया समय?
सरकारी प्रस्ताव में कहा गया है कि कुछ जिलों में मराठा-कुणबी वंशावली से जुड़े रिकॉर्ड तलाशने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। इसलिए समिति को और समय देना जरूरी था। मराठा आरक्षण पर बनी मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने भी इसका कार्यकाल एक साल बढ़ाने की सिफारिश की थी। इस उपसमिति की अध्यक्षता वरिष्ठ मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल कर रहे हैं। समिति का गठन 7 सितंबर 2023 को किया गया था। इसके बाद इसके कार्यकाल को कई बार बढ़ाया गया। यह समिति उस समय बनाई गई थी, जब जरांगे ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अपना पहला अनशन शुरू किया था।

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जरांगे अनशन पर अड़े
जरांगे की मांग है कि मराठों को कुणबी जाति प्रमाणपत्र दिया जाए, ताकि वे अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का लाभ ले सकें। सरकार का कहना है कि जिन मराठों के पुराने रिकॉर्ड में वे या उनके पूर्वज कुणबी-मराठा के रूप में दर्ज हैं, उन्हें प्रमाणपत्र दिया जाएगा। जरांगे 29 अगस्त से जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने पर कायम हैं। सोमवार को मंत्री शंभूराज देसाई, राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत ने उनसे मुलाकात की और आंदोलन न करने की अपील की। लेकिन 44 वर्षीय जरांगे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
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