मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को कथित ‘अवैध टेलीफोन एक्सचेंज केस’ में मारन बंधुओं समेत सभी आरोपियों को आरोपमुक्त करने के सीबीआई अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया।
सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश जी. जयचंद्रन ने विशेष अदालत को आरोप तय करने का निर्देश दिया। यही नहीं उन्होंने हाईकोर्ट के ऑर्डर की प्रति मिलने की तारीख से एक साल के भीतर ही मुकदमे की सुनवाई भी पूरी करने के लिए कहा।
विशेष सीबीआई अदालत ने 14 मार्च को इस केस में दयानिधि मारन, उनके भाई कलानिधि एवं अन्य पांच आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था। अदालत ने कहा था कि मारन बंधुओं एवं अन्य के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई केस नहीं बनता है।
जिन अन्य आरोपियों को बरी किया गया था उनमें बीएसएनएल के पूर्व महाप्रबंधक के. ब्रह्मनाथन, पूर्व उप महाप्रबंधक एम. पी. वेलुसामी, दयानिधि मारन के निजी सचिव गौतमन एवं सन टीवी के कुछ अधिकारी शामिल हैं। बता दें कि अरबपति कारोबारी कलानिधि मारन सन समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष हैं।
खजाने को 1.78 करोड़ का नुकसान पहुंचाने का आरोप
सीबीआई का आरोप था कि वर्ष 2004-06 के दौरान जब दयानिधि मारन दूरसंचार मंत्री थे तो उनके आवास पर एक गैरकानूनी निजी टेलीफोन एक्सचेंज लगाया गया। इसका इस्तेमाल कलानिधि के सन नेटवर्क से जुड़े कारोबारी लेनदेन में किया गया। सीबीआई का आरोप था कि दयानिधि मारन ने खजाने को 1.78 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया।