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बड़ी चूक: राज्यों के खजाने पर संकट, प्रदेशों के आयोगों का आंकड़ा सात तक नहीं पहुंचा

Thu, 11 Mar 2021 06:40 AM IST
देव कश्यप जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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15th Finance Commission Report - फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार, सभी प्रदेशों को ग्रांट एवं दूसरी आर्थिक मदद देती रहती है। प्रदेशों के लिए विभिन्न मदों के तहत जो राशि स्वीकृत की जाती है, उसमें केंद्रीय वित्तीय आयोग द्वारा की गई सिफारिशें बहुत अहम होती हैं। राज्य सरकारें एक मामले में बड़ी चूक कर रही हैं। इस चूक के कारण उनके खजाने पर संकट आ सकता है।

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राज्यों को मिलने वाली कई तरह की आर्थिक सहायता या ग्रांट पर कैंची चलने के आसार बन रहे हैं। वित्तीय आयोग के गठन को लेकर अधिकांश प्रदेश बुरी तरह पिछड़ रहे हैं। केंद्र सरकार 15वें वित्तीय आयोग का गठन कर चुकी है, जबकि 25 से ज्यादा राज्य ऐसे हैं जो अभी तक पांचवें या छठे वित्तीय आयोग तक ही पहुंच सके हैं।

असम, बिहार, पंजाब और राजस्थान में ही छठे वित्तीय आयोग गठित किया गया है। बाकी राज्यों में अभी तक दूसरा, तीसरा या चौथा आयोग ही गठित हो पाया है।पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर एवं तेलंगाना में केवल एक ही वित्तीय आयोग का गठन हो सका है। केंद्र के 15वें वित्तीय आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय आयोग के गठन में विफल रहने वाले राज्यों में स्थानीय निकायों व दूसरी मदों के लिए अनुदान की अनुशंसा न करें।
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बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 243-1(1) से लेकर 243-1(4) के अनुसार, जिस तरह से केंद्र सरकार वित्तीय आयोग गठित करती है, वैसे ही हर पांच साल बाद राज्यों में वित्तीय आयोग गठित करने का प्रावधान है। वित्तीय आयोग ही यह सिफारिश करता है कि राज्यों की संचित निधि का वर्धन कैसे किया जाए। राज्य अपने वित्तीय आयोग की अनुशंसा से स्थानीय निकायों एवं दूसरी मदों के लिए आर्थिक मदद मुहैया करा सकता है।

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राज्यों के वित्त आयोगों के गठन की स्थिति

केंद्र के 15वें वित्तीय आयोग की रिपोर्ट में लिखा है कि हमें राज्य वित्त आयोगों की अनुशंसाओं का लाभ नहीं मिलता। वजह, अधिकांश राज्य निर्धारित समय पर वित्त आयोग गठित नहीं कर सके। नियम यह है कि प्रत्येक पांच वर्ष की समाप्ति पर राज्य वित्त आयोगों का गठन किया जाए।

राज्यों में ऐसी है स्थिति
-असम, बिहार, पंजाब व राजस्थान में छठा वित्तीय आयोग।
-हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में पांचवां वित्तीय आयोग।
-आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में चौथा आयोग। 
-छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, झारखंड और मणिपुर में तीसरा वित्तीय आयोग।
-अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में दूसरा वित्तीय आयोग।
-पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर एवं तेलंगाना में अभी तक केवल एक ही आयोग गठित किया गया है।

15वें वित्तीय आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य वित्त आयोगों को खराब प्रशासनिक सहायता, अपने सुचारु संचालन के लिए अपर्याप्त संसाधनों तथा राज्य विधानमंडलों के समक्ष ऐक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) को विलंब से प्रस्तुत करने जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।  राष्ट्रीय लोकवित्त एवं नीति संस्थान 'एनआईपीएफपी' के अनुसार राज्य वित्त आयोगों द्वारा अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने में किया गया औसत विलंब लगभग सोलह माह है। आयोग ने कहा, जिन राज्यों ने वित्तीय आयोग का गठन नहीं किया है, वहां के स्थानीय निकायों के लिए अनुदान की अनुशंसा न करें। सभी राज्यों को सुनिश्चित करना होगा कि वे राज्य वित्त आयोग का गठन करें और उनकी अनुशंसाओं को समयबद्ध प्रक्रिया में मूल भावना के साथ कार्यान्वित करें।

इसके बाद 15वें वित्तीय आयोग ने यह अनुशंसा की है कि जिन राज्यों ने 'राज्य वित्तीय आयोग' का गठन नहीं किया है, वे इस दिशा में तुरंत कदम आगे बढ़ाएं। राज्य वित्तीय आयोग द्वारा जारी अनुशंसाओं को कार्यान्वित करें। उन पर क्या कार्रवाई हुई है, उसकी रिपोर्ट मार्च 2024 तक राज्य विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

मार्च 2024 के बाद उन राज्यों को कोई भी अनुदान जारी नहीं किए जाने चाहिए, जिन्होंने राज्य वित्तीय आयोग और इसकी शर्तों के बारे में संवैधानिक उपबंधों का अनुपालन नहीं किया है। साल 2024-25 और 2025-26 के लिए राज्यों की हिस्सेदारी के अनुदानों को जारी करने से पहले पंचायती राज मंत्रालय इस संबंध में राज्य द्वारा अनुपालन किए गए सभी संवैधानिक उपबंधों को सत्यापित करेगा।
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