बीटिंग द रिट्रीट समारोह।
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बीटिंग द रिट्रीट के दौरान तीनों सेनाओं के साथ ही सीएपीएफ के बैंड ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य लोगों के सामने 30 फुट टैपिंग धुनें बजाईं। इनमें 'कदम कदम बढ़ाए जा' और 'ऐ वतन तेरे लिए' से लेकर 'गंगा जमुना' और 'भारत के जवान' तक शामिल थीं।
बीटिंग द रिट्रीट समारोह में पारंपरिक रूप स बग्घी पर जाती राष्ट्रपति मुर्मू।
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इस समारोह में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पारंपरिक रूप से खुली सोने की परत वाली बग्घी में सवार होकर विजय चौक पहुंची। उनके अलावा, बीटिंग रिट्रीट समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेता मौजूद रहे। नेताओं के अलावा बड़ी संख्या में जनता ने भी बीटिंग द रिट्रीट देखी।
बीटिंग द रिट्रीट समारोह।
- फोटो : अमर उजाला
बीटिंग रिट्रीट समारोह के दौरान रायसीना हिल्स और विजय चौक को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था।
बीटिंग द रिट्रीट समारोह।
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क्या है बीटिंग रिट्रीट समारोह
इस कार्यक्रम के होने का मतलब है गणतंत्र दिवस समारोह की औपचारिक घोषणा होती है। दरअसल 26 से लेकर 29 जनवरी के बीच विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है और सरकारी भवनों को रोशनी से जगमग किया जाता है। यह न सिर्फ गणतंत्र दिवस समारोह के समापन का प्रतीक है बल्कि सेना को वापस बैरक में भेजने का आधिकारिक संदेश भी होता है। इस समारोह में देश की तीनों सेनाएं हिस्सा लेती हैं और पारंपरिक धुनों के साथ मार्चपास्ट करती हैं। यह सभी धुन सेनाओं के बैंड द्वारा बजायी जाती है और ‘अबाइड विद मी’ भी इसमें शामिल है।
बीटिंग द रिट्रीट समारोह।
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वहीं ट्युबुलर घंटियों के जरिए चाइम्स बजाई जाती हैं। यह काफी दूरी पर रखा होता है जिससे बहुत शानदार दृश्य बनता है। इसके बाद रिट्रीट का बिगुल वादन होता है, जब बैंड मास्टर राष्ट्रपति के पास जाते हैं और बैंड की विदाई की अनुमति मांगते हैं।
जब राष्ट्रपति की अनुमति मिल जाती है तो यह सूचित किया जाता है कि गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों का समापन समारोह पूरा हो गया है। जब बैंड वापस जाने लगते हैं तो वह 'सारे जहां से अच्छा' की लोकप्रिय धुन बजाते हैं। शाम को ठीक 6 बजे बगलर्स रिट्रीट की धुन बजाते हैं और तिरंगे को उतार लिया जाता है। तिरंगे को उतारने के बाद राष्ट्रगान बजाया जाता है और इस तरह से गणतंत्र दिवस के आयोजन का औपचारिक समापन हो जाता है।