भाजपा असम में बांग्लादेशी नागरिकों के मुद्दे पर बेहद आक्रामक है। वह हर कीमत पर मूल असमी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की बात करती है और इसके लिए बांग्लादेशी नागरिकों को राज्य से हटाने का मुद्दा उठाती है। लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में ही भारी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक रहते हैं, इनकी पहचान होने के बाद भी सरकार आज तक उन्हें वापस नहीं भेज पाई। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र लिखकर इन्हें हटाए जाने की मांग की है।
सुरक्षा के लिए खतरा
दिल्ली के कई इलाकों में बांग्लादेशी नागरिक भारी संख्या में रहते हैं। वे अक्सर कबाड़ खरीदने-बेचने, रिक्शा चलाने या घरों में नौकरों के रुप में काम करते हैं। लेकिन अवसर पाते ही ये वारदात को अंजाम देकर भाग निकलते हैं। कोई स्थाई पता-ठिकाना न होने के कारण बाद में पुलिस को इन्हें पकड़ पाना बेहद मुश्किल होता है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि चोरी, छिनैती, मोबाइल स्नैचिंग से लेकर लूटपाट और हत्या जैसे संगीन अपराधों में भी इनकी बड़ी भूमिका सामने आई है।
दिल्ली में रहते हुए बांग्लादेशी नागरिकों ने यहां का राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड तक बनवा लिया है। ऐसे में अब इनकी पहचान करना भी मुश्किल हो गया है। एक जानकारी के मुताबिक साल 2006 से लेकर साल 2011 के बीच सिर्फ 1,760 बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए थे।