महाराष्ट्र में एक बार फिर मराठा आरक्षण की मांग चर्चाओं में हैं। मराठा आंदोलन के प्रमुख मनोज जरांगे ने मंगलवार को सरकार को अल्टीमेटम दिया है। जरांगे का कहना है कि बुधवार से उनकी मांगों को लागू किया जाए नहीं तो 10 फरवरी से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कुनबी प्रमाण पत्र वाले मराठों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में कोटा लाभ प्राप्त करने की अनुमति देने के लिए अधिसूचना को कानून में बदलने के लिए राज्य विधानमंडल का एक विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए।
यूबीटी पर धोखाधड़ी से आईटी रिटर्न दाखिल करने का आरोप लगाया
महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल शिवसेना (शिंदे गुट) ने मंगलवार को मुंबई पुलिस से धोखाधड़ी की शिकायत की है। उन्होंने धोखाधड़ी से आयकर रिटर्न दायर करने के आरोप में उद्धव गुट के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मुंबई पुलिस कमिशनर, साइबर पुलिस स्टेशन को लिखे गए शिकायती पत्र में शिंदे गुट के कोषाध्यक्ष बालाजी किनिकर ने कहा कि शिंदे गुट को चुनाव आयोग द्वारा पार्टी का प्रतीक चिन्ह आवंटित होने के बाद भी उद्धव गुट ने एक जाली पैनकार्ड खरीदा और तो और उन्होंने खुद को हमारी पार्टी का सदस्य बताकर जुलाई से सितंबर 2023 का टीडीएस रिटर्न दाखिल कर दिया। उन्होंने रिटर्न दाखिल करने के लिए पासवर्ड-लॉगिन आईडी का फर्जी इस्तेमाल किया, जो चोरी, जालसाजी और धोखाधड़ी का काम है। हालांकि, पुलिस ने अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की।
कौन हैं मनोज जरांगे?
आंदोलन की अगुवाई कर रहे मनोज जारांगे पाटिल मूलत: बीड जिले के रहने वाले हैं। मटोरी गांव में जन्मे मनोज ने 12वीं तक पढ़ाई की है। आजीविका के लिए बीड से जालना आ गए। यहां एक होटल में काम करते हुए उन्होंने सामाजिक कार्य शुरू किए। इसी दौरान शिवबा नामक संगठन की स्थापना की। मनोज 2011 से मराठा आरक्षण के आंदोलन में सक्रिय हैं। 2014 में उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में डिविजनल कमिश्नरेट के खिलाफ अपने मार्च से सभी का ध्यान खींचा था। 2015 से 2023 के बीच उन्होंने 30 से ज्यादा आंदोलन किये। 2021 में उन्होंने जालना जिले के साष्टा पिंपलगांव में 90 दिनों की हड़ताल की थी। बताया जाता है कि मनोज जरांगे की आर्थिक स्थिति खराब है, लेकिन उन्होंने खुद को मराठा समुदाय के लिए समर्पित कर दिया है। उनके पास चार एकड़ जमीन थी जिसमें से दो एकड़ जमीन उन्होंने मराठा समुदाय के आंदोलन के लिए बेच दी थी।