गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर का लंबी बीमारी के बाद रविवार शाम को निधन हो गया। वह 63 साल के थे। लगभग एक साल से उनका गोवा, नई दिल्ली, न्यूयॉर्क और मुंबई में इलाज चल रहा था। अपने पीछे वह दो बेटों उत्पल और अभिजात परिकर को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी मेधा परिकर की 2001 में कैंसर से मौत हो गई थी।
परिकर देश के पहले आईआईटीयन मुख्यमंत्री थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी और सरलता और बिना दिखावे के बिताया। बतौर मुख्यमंत्री किसी की परवाह किए बिना वह स्कूटर से विधानसभा पहुंच जाया करते थे। उन्हें वीआईपी कल्चर बिलकुल भी पसंद नहीं था। उनकी छवि हमेशा एक बेदाग नेता वाली रही। वह रेस्तरां की बजाए फुटपाथ पर चाय नाश्ता करते थे।
पूर्व रक्षामंत्री के परिवार की बात करें तो परिकर ने 1981 में मेधा से शादी की थी। दंपति के दो बेटे उत्पल और अभिजात परिकर हैं। पहली बार गोवा का मुख्यमंत्री पद संभालने के कुछ महीनों बाद ही उनकी पत्नी का देहांत हो गया था। उन्होंने राज्य की जिम्मेदारी के साथ ही अपने लड़कों को भी बखूबी संभाला जो उस वक्त किशोर थे। परिकर भारतीय व्यवसायी नंदन निलेकणी के सहपाठी रह चुके हैं।
परिकर के बड़े बेटे उत्पल ने मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की है। उत्पल ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से पढ़ाई कर चुकीं उमा सरदेसाई से शादी की है। वहीं छोटा बेटा अभिजात एक व्यवसायी है। अभिजात ने साई नाम की फार्मासिस्ट से शादी की है।
गोवा के मुख्यमंत्री रहते हुए परिकर सरकार द्वारा आवंटित किए हुए बड़े घर में रहने नहीं हुए। इसकी बजाए उन्होंने अपने घर में रहना पंसद किया। उन्होंने अपनी कार को भी अपग्रेड नहीं किया। वह पंक्ति में लगकर खाना खाते थे। अपना काम भी लाइन में लगकर ही करवाते थे। उनकी सादगी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उन्हें हूटर लगी गाड़ियां पसंद नहीं थीं।
परिकर बिजनेस क्लास की बजाए इकोनॉमी क्लास में हवाई यात्रा किया करते थे। निजी फोन कॉल के पैसे वह अपनी जेब से देते थे। वह एक आम आदमी की तरह रिक्शा और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल किया करते थे। रोजाना 16-18 घंटे काम करते थे। उन्होंने ही भाजपा अधिवेशन में सबसे पहले प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी का नाम प्रस्तावित किया था।