मणिपुर के हिंसा प्रभावित जिरीबाम जिले में सात नवंबर को मारी गई आदिवासी महिला के शव परीक्षण रिपोर्ट से पता चला है कि उसे थर्ड-डिग्री यातना का शिकार बनाया गया था और वह 99 फीसदी तक जल गई थी। महिला के शव का परीक्षण नौ नवंबर को असम के सिलचर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किया गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 31 वर्षीय आदिवासी महिला के शरीर के कई हिस्से और हाथ-पैर गायब थे और केमिकल विश्लेषण के लिए विसरा एकत्र नहीं किया जा सका, क्योंकि अधिकांश जल गए थे और पहचानने योग्य नहीं थे। इसमें यह भी कहा गया है कि मस्तिष्क के ऊतक को प्लास्टिक में लपेटा हुआ पाया गया था, जो पिघला हुआ था।
उग्रवादी समूह ने किया था महिला के घर पर हमला
तीन बच्चों की मां का शव सात नवंबर को सशस्त्र उग्रवादियों के एक समूह के हमले के बाद जैरॉन गांव में उनके घर पर पाया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि थर्ड डिग्री यातना के बाद मृत्यु से पहले जलने के कारण सदमे से महिला की मौत हुई। उनके शरीर का 99 फीसदी हिस्सा जल गया था।
अस्पताल को मिला था पूरा जला हुआ शव
रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल को पूरी तरह से जला हुई शव मिला, साथ ही हड्डी के जले हुए टुकड़े भी मिले, जिनमें स्वस्थ मुलायम उतक नहीं थे। इसमें कहा गया है कि दाहिना ऊपरी अंग और दोनों निचले अंगों के हिस्से और चेहरे का ढांचा भी गायब पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सूक्ष्म विश्लेषण के लिए योनि का नमूना नहीं लिया जा सका, क्योंकि शव के अंग पूरी तरह से जले हुए थे और पहचानने योग्य नहीं थे।
विसरा नमूने एकत्र नहीं किए जा सके
रिपोर्ट में कहा गया है कि केमिकल विश्लेषण के लिए आतंरिक अंगों (विसरा) का नमूना नहीं लिया जा सका, क्योंकि अधिकांश पहचानने योग्य नहीं थे या गायब थे। जलने और अलग हुई हड्डियों के टुकड़ों में किसी भी प्रकार की जीवन की प्रतिक्रिया नहीं दिखी।
जातीय हिंसा में मारे जा चुके 220 से ज्यादा लोग
उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में पिछले साल मई में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से 220 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। जातीय दृष्टि से विविधि जिरिबाम पहले इंफाल घाटी और आस-पास की पहाड़ियों में हुए संघर्ष से प्रभावित नहीं था। लेकिन इस साल जून में एक किसान का कटा-फटा शव खेत में मिला, जिसके बाद यह जिला भी हिंसक झड़पों की चपेट में आया।
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