मणिपुर की हिंसा के दौरान दुष्कर्म का शिकार हुई युवती की मौत के बाद कुकी संगठनों ने न्याय की मांग तेज कर दी है। संगठनों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा है। संगठनों ने दोषियों पर कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई है।
साल 2023 में मणिपुर हिंसा के दौरान दुष्कर्म का शिकार हुई कुकी युवती की 32 महीनों बाद अस्पताल में मौत हो गई, जिसके बाद कई संगठनों ने पीड़िता के लिए न्याय की मांग की है। संगठनों का आरोप है कि महिला की जान उस बीमारी और गहरे सदमे की वजह से गई, जो मई 2023 में उसके साथ हुआ था।
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गुवाहाटी में तोड़ा दम
चुराचांदपुर और दिल्ली स्थित कुकी संगठनों ने दावा किया कि मई 2023 में इंफाल से महिला का अपहरण किया गया था और उसके साथ दरिंदगी की गई थी। वह किसी तरह अपहरणकर्ताओं के चंगुल से बच निकली, लेकिन शारीरिक चोटों और मानसिक आघात से उबर नहीं पाई और दस जनवरी को गुवाहाटी में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
अलग प्रशासन ही एकमात्र विकल्प
इस घटना के बाद कुकी संगठनों ने केंद्र सरकार से अलग प्रशासन की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि मैतेई समुदाय के साथ अब उनका रहना संभव नहीं है। 'इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम' (आईटीएलएफ) ने कहा कि यह मौत इस बात का सबूत है कि कुकी-जो लोगों को कितनी बेरहमी से निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि अब सुरक्षा और सम्मान के लिए अलग प्रशासन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
दोषियों पर कार्रवाई न होने से नाराजगी
'कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन' (केएसओ) ने आरोप लगाया कि बार-बार अपील करने के बाद भी दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। संगठन ने मांग की है कि महिला की मौत को आधिकारिक तौर पर 2023 की हिंसा का परिणाम जाना चाहिए। वहीं, कुकी-जो विमेन फोरम ने कहा कि पीड़िता ने लगभग तीन साल तक ऐसा दर्द सहा जो किसी इंसान को नहीं सहना चाहिए।
क्या है मामला?
बता दें कि मई 2023 से मणिपुर में इंफाल घाटी के मैतेई और पहाड़ियों में रहने वाले कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में कम से कम 260 लोग मारे गए थे। इसके चलते हजारों लोगों को बेघर होना पड़ा था। राज्य में पिछले साल फरवरी से राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है।