मौजूदा कानून के तहत मैतेई समुदाय को राज्य के पहाड़ी इलाकों में बसने की इजाजत नहीं है। यही वजह है कि मैतेई समुदाय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें जनजातीय वर्ग में शामिल करने की गुहार लगाई थी। अदालत में याचिकाकर्ता ने कहा कि 1949 में मणिपुर की रियासत के भारत संघ में विलय से पहले मैतेई समुदाय को एक जनजाति के रूप में मान्यता थी। इसके बाद ही उच्च न्यायालय ने सरकार को नए निर्देश दिए थे।
PM Manipur Visit: पीएम मोदी ने मणिपुर के स्थानीय लोगों से की मुलाकात, मिलते ही भावुक हुए हिंसा पीड़ित
अब जानें- मणिपुर में ताजा स्थिति कैसी?
मणिपुर में 2023 में हिंसा भड़कने के बाद से अब तक 260 लोगों की मौत हो चुकी है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, हजारों लोग अभी भी विस्थापित हैं और राहत कैंपों में रहने को मजबूर हैं। न तो मैतेई समुदाय के लोग उन क्षेत्रों में जा पा रहे हैं, जहां कुकी या अन्य समुदाय बहुसंख्यक हैं और न ही इसका उल्टा संभव है। सुरक्षाबल अब भी मैतेई और कुकी समुदाय के प्रभाव वाले इलाकों के बीच बफर जोन में तैनात हैं, ताकि तनाव और हिंसा फिर न भड़के। इसके बावजूद पीएम मोदी के दौरे से ठीक पहले गुरुवार शाम को कुकी बहुल चुराचंदपुर जिले में दो स्थानों पर उपद्रवियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई। उपद्रवियों ने सड़कों पर लगे बैनर और कटआउट फाड़ दिए। वहीं, पियर्सनमुन गांव और फिलियन बाजार में प्रधानमंत्री के दौरे के लिए लगाए गए बैरिकेड्स को भी तोड़ दिया गया। चुराचांदपुर में व्यवस्था और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए अर्धसैनिक बलों द्वारा फ्लैग मार्च और गश्त जारी है।
Congress: गौरव गोगोई ने PM के मणिपुर दौरे पर साधा निशाना, कहा- जमीनी हकीकत पर नहीं, मोदी की छवि चमकाने पर फोकस
दूसरी तरफ मणिपुर में राष्ट्रपति शासन अभी भी लागू है। यहां विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक खत्म होना है। इतना ही नहीं म्यांमार से शरणार्थियों और अवैध प्रवासियों के आने की घटनाएं भी दर्ज हुई हैं, जिनके चलते सरकार का ध्यान अब सीमाई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी है।
किन सुरक्षा इंतजामों के बीच संभव हुआ पीएम मोदी का मणिपुर दौरा?
प्रधानमंत्री मोदी के मणिपुर दौरे से पहले इंफाल और चुराचांदपुर में सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए गए। इस दौरे में सुरक्षा को लेकर गोपनीयता किस हद तक रही, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आधिकारिक तौर पर दौरे की जानकारी अंतिम समय में ही सार्वजनिक हुई।

" />
इंफाल में करीब 237 एकड़ में फैले कांगला किले और चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड के आसपास बड़ी संख्या में राज्य और केंद्रीय बलों के जवान तैनात किए गए। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए यहां जिस भव्य मंच का निर्माण किया गया, उसके आसपास मार्ग पर बैरिकेड्स लगा दिए गए। संवेदनशील और सीमांत क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया गया। सीआरपीएफ ने पहाड़ी और घाटी दोनों जिलों में असामाजिक तत्वों की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए अस्थायी चौकियां स्थापित कीं। इसके लिए केंद्रीय अधिकारी बीते कई हफ्तों से मणिपुर में डेरा जमाए थे और मैतेई और कुकी समुदाय के नेताओं के साथ बैठक भी कर रहे थे।
राज्य कर्मचारियों के साथ केंद्रीय सुरक्षा दल कांगला किले का चौबीसों घंटे निरीक्षण कर रहे हैं और राज्य आपदा प्रबंधन बल की नौकाओं को किले के चारों ओर की खाइयों में गश्त के लिए लगाया गया। 1891 में रियासत के विलय से पहले कांगला किला तत्कालीन मणिपुरी शासकों की सत्ता का प्राचीन केंद्र हुआ करता था। तीन तरफ खाइयों और पूर्वी तरफ इंफाल नदी से घिरा यह किला एक बड़े पोलो मैदान, जंगल, मंदिरों के खंडहर और राज्य पुरातात्विक कार्यालयों से घिरा है।