मणिपुर के संवेदनशील बिष्णुपुर और चुराचांदपुर जिलों के सीमावर्ती इलाकों में मंगलवार रात को फिर ताजा हिंसा भड़की। बिष्णुपुर के सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध उग्रवादियों की फायरिंग के बाद तनाव बढ़ गया है। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। यह वारदात ऐसे समय हुई है, जब जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोग हाल में घर लौटे हैं।
एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक बिष्णुपुर के तोरबुंग और फौगाकचाओ इखाई इलाकों में कई राउंड फायरिंग हुई। ये क्षेत्र चुराचांदपुर जिले की सीमा से सटे हैं। सूचना मिलते वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में अतिरिक्त सुरक्षा बलों ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया, ताकि फायरिंग में शामिल संदिग्ध उग्रवादियों को पकड़ा जा सके। इस चलते पुनर्वसित तोरबुंग और फौगाकचाओ इखाई गांवों में भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। एक अधिकारी ने बताया कि 3 महीने बाद फायरिंग की घटना सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, चुराचांदपुर की ओर से सक्रिय अज्ञात सशस्त्र समूहों और सुरक्षा बलों के बीच भारी गोलीबारी हुई। बताया जा रहा कि संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने तोरबुंग में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) के हालिया पुनर्वास का विरोध करते हुए पहले बम और गोलीबारी की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई।
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फायरिंग की निंदा
राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने घटना की कड़ी निंदा की है। हिंसा के विरोध में कुछ हिस्सों में बाजार बंद रहे। नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के प्रदेश अध्यक्ष फोजे एस. लोरो ने कहा कि कुछ महीनों में शांति की दिशा में प्रगति हुई है, ऐसे में ताजा हिंसा दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बीच बिष्णुपुर के मोइरांग कस्बे और इंफाल के न्यू चेकॉन इलाके में विरोध स्वरूप बाजार और दुकानें बंद रहीं।