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मणिपुर हिंसा: वे देख नहीं सकते लेकिन आंखों ने सब हाल कह दिया, जानें क्यों हो रही असम राइफल्स की तारीफ

Mon, 15 May 2023 08:01 AM IST
गुलाम अहमद गुवाहाटी/इंफाल (एन. अर्जुन)।

सार

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मिशन ब्लाइंड स्कूल के प्रधानाचार्य के पारेनाग कॉम ने बच्चों और सहायकों को निकालने की अपील की थी। यह स्कूल काकचिंग जिले में है।
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visually impaired students - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिंसाग्रस्त मणिपुर से एक बहुत अच्छी तस्वीर सामने आई है। इसके लिए असम राइफल्स की हर ओर तारीफ हो रही है। उन्होंने हिंसाग्रस्त क्षेत्र से ऐसे 45 बच्चों और सहायक कर्मचारियों को सुरिक्षत निकाला, जिनमें से अधिकतर दुनिया को देख नहीं पाते, लेकिन जब असम राइफल्स के जवानों ने उनको गाड़ी से उतारा तो उनकी चमकती आंखें उनकी जुबां बनीं। वे मुंह से तो कुछ बोले नहीं, लेकिन उनकी आंखों ने सब हाल बयां कर दिया। उनको देखने वालों की आंखें नम हो आईं। वे कई दिनों से इसका इंतजार कर रहे थे। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मिशन ब्लाइंड स्कूल के प्रधानाचार्य के पारेनाग कॉम ने बच्चों और सहायकों को निकालने की अपील की थी। यह स्कूल काकचिंग जिले में है।
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असम राइफल्स को इन्हें निकालने की जिम्मेदारी दी गई थी
फंसे हुए दृष्टिबाधित बच्चों और सहायक कर्मचारियों को बचाने के लिए एक आंतरिक सुरक्षा टुकड़ी बनाई गई। जवानों ने बहुत ही सावधानी से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और उनको काकचिंग गैरीसन में ले जाया गया। यहां पर जब उनको सेना की गाड़ी से उतारा जा रहा था, तो वे चहक रहे थे। उनके चेहरे पर खुशी झलक रही थी। यहां पर सभी को रहने और भोज की व्यवस्था की गई है। इसके बाद असम राइफल्स के जवानों ने इनके परिवारों को बुलाया और बच्चे उनके अभिभावकों के हवाले किए।
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