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RSS: मणिपुर में आरएसएस प्रमुख ने जनजातीय नेताओं को संबोधित किया बोले- परिवार के अंदर ही सुलझने चाहिए मुद्दे

Fri, 21 Nov 2025 07:02 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल

सार

अपने तीन दिवसीय मणिपुर दौरे के दूसरे दिन भागवत ने इंफाल में जनजातीय नेताओं से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा “आरएसएस किसी के खिलाफ नहीं है। इसे नष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि समाज को पूर्ण बनाने के लिए गठित हुआ है।”
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मोहन भागवत के बयान का अंश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को मणिपुर की राजधानी इंफाल में जनजातीय नेताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने सामाजिक एकता का आह्वान किया और कहा कि संघ समाज को सशक्त करने के लिए समर्पित संस्था है।
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अपने तीन दिवसीय मणिपुर दौरे के दूसरे दिन भागवत ने इंफाल में जनजातीय नेताओं से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा “आरएसएस किसी के खिलाफ नहीं है। इसे नष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि समाज को पूर्ण बनाने के लिए गठित हुआ है।” उन्होंने कहा कि संघ न राजनीति करता है, न किसी संगठन को दूर से नियंत्रित करता है। आरएसएस केवल मित्रता, स्नेह और सामाजिक सौहार्द के माध्यम से कार्य करता है।

भारत की सभ्यता आधारित निरंतरता पर जोर देते हुए भागवत ने कहा, “हम साझा चेतना के कारण एक हैं। विविधता के बावजूद हम एक ही सभ्यतागत परिवार से हैं। एकता हमेशा समानता की मांग नहीं करती।” उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना बाहरी कारणों से नहीं, बल्कि आंतरिक विघटन को दूर करने के उद्देश्य से हुई थी और डॉ. केबी हेडगेवार ने समाज को जोड़ने का प्रयास किया।

भागवत ने कहा कि “आरएसएस मनुष्य निर्माण और चरित्र निर्माण का आंदोलन है।” उन्होंने सभी को संघ की शाखाओं में जाकर यह समझने की सलाह दी कि संघ जमीनी स्तर पर कैसे काम करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सभ्यता को लेकर प्रतिबद्धता के साथ समाज की भलाई के लिए काम करने वाला हर व्यक्ति अघोषित स्वयंसेवक है।
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जनजातीय नेताओं के सवालों के भी दिए जवाब
जनजातीय नेताओं की ओर से उठाए गए मुद्दों पर मोहन भागवत ने कहा कि ये राष्ट्रीय चिंताएं हैं। उन्होंने आत्मनिर्भरता और संविधान के भीतर समाधान खोजने पर बल दिया। उन्होंने कहा, “परिवार के मुद्दे परिवार के अंदर ही सुलझाए जाने चाहिए। संवाद एकत्व पर आधारित होना चाहिए, न कि सौदेबाजी पर।” उन्होंने यह भी कहा कि कई क्षेत्रीय मुद्दों और विभाजनों की जड़ें औपनिवेशिक नीतियों में रही हैं।

भागवत ने जनजातीय नेताओं से अपनी स्वदेशी परंपराओं, भाषाओं और लिपियों पर गर्व करने और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी स्वदेशी जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया। युवा नेताओं से अलग बातचीत में, उन्होंने युवाओं से कहा कि भारत कोई नया राष्ट्र नहीं, बल्कि एक प्राचीन और निरंतर सभ्यता है।

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस शाखाएं जिम्मेदार, सक्षम और निस्वार्थ नागरिकों को तैयार करने का काम करती हैं, जो अपनी प्रतिभा और क्षमता देश के लिए समर्पित करते हैं।
 
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