भारत की सभ्यता आधारित निरंतरता पर जोर देते हुए भागवत ने कहा, “हम साझा चेतना के कारण एक हैं। विविधता के बावजूद हम एक ही सभ्यतागत परिवार से हैं। एकता हमेशा समानता की मांग नहीं करती।” उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना बाहरी कारणों से नहीं, बल्कि आंतरिक विघटन को दूर करने के उद्देश्य से हुई थी और डॉ. केबी हेडगेवार ने समाज को जोड़ने का प्रयास किया।
भागवत ने कहा कि “आरएसएस मनुष्य निर्माण और चरित्र निर्माण का आंदोलन है।” उन्होंने सभी को संघ की शाखाओं में जाकर यह समझने की सलाह दी कि संघ जमीनी स्तर पर कैसे काम करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सभ्यता को लेकर प्रतिबद्धता के साथ समाज की भलाई के लिए काम करने वाला हर व्यक्ति अघोषित स्वयंसेवक है।