मणिपुर विधानसभा चुनावों में दलबदलू भारी मुश्किल में फंसे हैं। आम लोगों के बीच जाने पर उनको कई कड़वे सवालों का सामना करना पड़ रहा है। लोग अक्सर सवाल करते हैं कि क्या आपने महज सत्ता के लिए ही अपनी बरसों पुरानी पार्टी छोड़ी है आपके लिए सत्ता बड़ी है या जनता। उनको इसके जवाब नहीं सूझ रहे हैं।
ध्यान रहे कि कई नेताओं ने चुनावों के एलान के बाद टिकट नहीं मिलने की वजह से अपनी पार्टी बदल ली थी तो कुछ ने इस अंदेशे से पहले ही दूसरे दलों का दामन थाम लिया था। अब कुछ विधानसभा क्षेत्रों में तो स्थानीय कार्यकर्ता तक ऐसे नेताओं के लिए काम करने को तैयार नहीं हैं।
एक भाजपा नेता सवाल करते हैं कि हम आखिर ऐसे नेता के लिए काम क्यों करें तो कल तक कांग्रेस में था। हमारा तो पूरा जीवन ही कांग्रेस के कुशासन व भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने में बीता है। कांग्रेस ने जिन पूर्व भाजपा नेताओं को टिकट दिए हैं उनके इलाकों में भी यही स्थिति है। कांग्रेस व भाजपा दोनों दलों की सूची में ऐसे दलबदलुओं की भरमार है।
दलबदलुओं को टिकट देने में पहले नंबर पर रही भाजपा को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इससे कई जगह टिकट की आस लगाए बैठे स्थानीय नेता भी इस बार सक्रिय चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।