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Manipur: महिलाओं से बर्बरता के मुख्य आरोपी का चेहरा आया सामने; महिला आयोग ने ट्विटर से वीडियो हटाने को कहा

Thu, 20 Jul 2023 04:57 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा कि जैसे ही वीडियो हमारे संज्ञान में आया, हमने आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की। हमने एक मिनट भी जाया नहीं किया है। घटना में शामिल लोगों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। कल एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। अभी मुझे जानकारी मिली है कि एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। जांच जारी है।
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Manipur - फोटो : ANI
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विस्तार
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मणिपुर के कांगपोकपी जिले में दो आदिवासी महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराने वाली भीड़ का हिस्सा रहे चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा कि जैसे ही वीडियो हमारे संज्ञान में आया, हमने आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की। हमने एक मिनट भी जाया नहीं किया है। घटना में शामिल लोगों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। कल एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। अभी मुझे जानकारी मिली है कि एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद पुलिस की ओर से भी एक बयान जारी कर दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी दी गई।

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इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने औपचारिक रूप से ट्विटर इंडिया के पब्लिक पॉलिसी प्रमुख को दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराने के घृणित कृत्य को दिखाने वाले वीडियो को हटाने का निर्देश दिया है। एनसीडब्ल्यू के मुताबिक, यह वीडियो पीड़ितों की पहचान उजागर करता है। इसके साथ ही यह एक दंडनीय अपराध भी है।

आज सुबह एक आरोपी को किया गया था गिरफ्तार
इससे पहले पुलिस ने आज सुबह एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। उसका नाम हुइरेम हेरोदास मैतेई बताया जा रहा है और उसकी उम्र 32 वर्ष बताई गई है। वह पेची अवांग लीकाई का है। वीडियो में यही शख्स मुख्य अपराधी लग रहा था, जिसने हरे रंग की टी-शर्ट पहनी हुई थी और महिला को पकड़ रखा था। वीडियो वायरल होने के बाद उसकी पहचान की गई और गुरुवार सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए अन्य तीन आरोपियों की पहचान तत्काल पता नहीं चली है।
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क्या है मामला?

  • पहाड़ी राज्य मणिपुर पिछले कुछ समय से जातीय हिंसा की चपेट में है, लेकिन अब एक वीडियो सामने आया है जिसमें महिलाओं को नग्न करके घुमाया जा रहा है। यह घटना राज्य की राजधानी इंफाल से लगभग 35 किलोमीटर दूर कांगपोकपी जिले के गांव बी. फीनोम में हुई। 
  • ग्राम प्रधान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, चार मई को शाम लगभग तीन बजे 900-1000 की संख्या में कई संगठनों से जुड़े लोग बी. फीनोम गांव में जबरदस्ती घुस आए। इनके पास एके राइफल्स, एसएल.आर इंसास और 303 राइफल्स जैसे अत्याधुनिक हथियार थे। 
  • हिंसक भीड़ ने सभी घरों में तोड़फोड़ की और फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, बर्तन, कपड़े, अनाज सहित नकदी को लूटने के बाद सभी चल संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा पांच ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए जंगल की ओर भाग गए। 
  • बाद में उन्हें नॉनपाक सेकमाई पुलिस टीम द्वारा बचाया गया और वे नोंगनोक सेकमाई थाने के रास्ते में थे। इस बीच उन्हें रास्ते में एक भीड़ ने रोक दिया और नोंगपोक सेकमाई थाने से लगभग दो किलोमीटर दूर और 33 एआर सोमरेई चौकी से लगभग तीन किलोमीटर दूर भीड़ ने उन्हें पुलिस टीम की सुरक्षा से छीन लिया। इसके अलावा एक 56 साल के व्यक्ति की घटनास्थल पर ही हत्या कर दी गई। 
  • प्रधान ने बताया कि इसी दौरान भीड़ द्वारा तीन महिलाओं को उनके कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया गया और भीड़ के सामने निर्वस्त्र कर दिया गया। घटना से जुड़े वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुरुष असहाय महिलाओं के साथ लगातार छेड़छाड़ कर रहे हैं, जो रो रही हैं और उनसे छोड़ने की गुहार लगा रही हैं। हैवानियत यहीं सीमित नहीं रही, एक 21 साल की लड़की का दिन दहाड़े बेरहमी से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। जब 19 वर्षीय छोटे भाई ने अपनी बहन की अस्मिता और जान बचाने की कोशिश की, तो भीड़ में शामिल लोगों ने उसकी मौके पर ही हत्या कर दी। हालांकि, पीड़िता कुछ लोगों की मदद से मौके से भागने में सफल रहीं।


एनएचआरसी ने भी लिया संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने  महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने, एक का यौन उत्पीड़न करने और भीड़ द्वारा एक परिवार के पांच सदस्यों को पुलिस हिरासत से ले जाने के मामले में मणिपुर सरकार को नोटिस भेजा है। एनएचआरसी ने मणिपुर के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने चार सप्ताह के भीतर मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें घटनाओं के संबंध में दर्ज एफआईआर की जांच की स्थिति शामिल है। इसके अलावा पीड़ित महिलाओं और अन्य घायल व्यक्तियों की स्वास्थ्य स्थिति और साथ ही पीड़ित व्यक्तियों या परिवारों को दिया गया मुआवजा आदि की जानकारी भी मांगी गई है। 

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मई से ही हालात खराब
मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 150 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

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